हाइट, रंग और लुक्स को लेकर युवाओं में बढ़ता तनाव

आजकल युवाओं में शारीरिक असंतोष की समस्या तेजी से बढ़ रही है। समाज में अपनी बॉडी और लुक्स को लेकर तनाव की स्थिति बन रही है, जिसके कारण कई युवा खुद को कमतर समझने लगते हैं। यह एक मानसिक समस्या बन गई है, जो आत्मविश्वास को प्रभावित कर रही है। हालांकि, शारीरिक रूप में कोई भी व्यक्ति अपने आप में खास होता है, लेकिन समाज में खुद को स्वीकार करना और इस पर काम करना सबसे महत्वपूर्ण है। ये समस्या सिर्फ शारीरिक रूप से जुड़ी नहीं है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य से भी गहरे रूप से जुड़ी है। इस तरह के मामलों में लोगों को काउंसलरों के पास तक जाकर अपनी समस्या का समाधान कराना पड़ रहा है। इस दिशा में जागरूकता बढ़ाने और लोगों को मानसिक संतुलन बनाए रखने की जरूरत है, ताकि वे अपने असली रूप में खुश रहें और अपनी पहचान को महत्व दें। सोशल मीडिया के दौर में ये समस्या और बढ़ी शहर के एक प्रमुख मनोचिकित्सक ने बताया कि सोशल मीडिया के दौर में यह समस्या और भी बढ़ गई है। हर महीने 4-5 ऐसे मामले उनके पास आते हैं। लोग खुद को पसंद नहीं करते, लेकिन दूसरों की नजरों में सुंदर बनने के लिए वे सोशल मीडिया पर फ़िल्टर का इस्तेमाल करते हैं। यह प्रवृत्ति युवाओं में मानसिक तनाव और आत्मसंकोच को जन्म देती है। इस तरह के मामलों में मानसिक उपचार और आत्मस्वीकृति की दिशा में काम किया जाता है। {केस 1: -लंबाई को लेकर असंतोष : एक 23 वर्षीय मेडिकल स्टूडेंट अपनी हाइट को लेकर परेशान था। वह सोचता था कि अगर उसे हाइट बढ़ाने के लिए सर्जरी करनी पड़े, तो वह करवा लेगा। अपने साथियों से अक्सर मजाक उड़ाए जाने की वजह से वह डिप्रेशन की ओर बढ़ने लगा। डॉक्टर से संपर्क करने पर उसे यह समझाया गया कि हाइट किसी का व्यक्तित्व तय नहीं करती। सचिन तेंदुलकर, सुनील गावस्कर और वरिंदर सहवाग की हाइट भी कम थी, लेकिन उनकी सफलता को देखकर कोई उनके शरीर की लंबाई पर ध्यान नहीं देता। {केस 2: रंग को लेकर तनाव : एक 27 वर्षीय लड़की सांवली त्वचा को लेकर चिंतित रहती थी। उसकी सहेलियां अपने गोरे रंग के कारण अक्सर उसकी तुलना करती थीं, जिससे उसके दिमाग पर गहरा असर पड़ा। वह मानसिक तनाव और एंग्जाइटी का शिकार हो गई। काउंसलिंग से उसे समझाया गया कि बॉलीवुड की हीरोइन या कामयाब महिलाओं की त्वचा का रंग कोई मायने नहीं रखता। {केस 3 : सर्जरी से नाक का बिगड़ा लुक: 29 वर्षीय एक लड़की को अपनी नाक का आकार पसंद नहीं था। उसने सर्जरी कराने का फैसला किया। लेकिन सर्जरी के बाद भी उसे सुकून नहीं मिला, बल्कि उसका लुक और बिगड़ गया। वह डिप्रेशन में चली गई डॉक्टर ने उसे समझाया कि बाहरी रूप-रंग में बदलाव से ज्यादा जरूरी है आत्म-सम्मान और आत्मस्वीकृति। {केस 4: बॉडी शेप नहीं लगती थी सही : 31 वर्षीय लड़की को लगता था कि उसकी बॉडी शेप सही नहीं है। यह सोच उसके मानसिक तनाव को बढ़ाती गई और उसके आत्मविश्वास पर भी असर पड़ा। डॉक्टर ने समझाया कि खुद को भगवान द्वारा बनाए गए रूप में स्वीकार करना चाहिए और किसी भी शारीरिक परिवर्तन की आवश्यकता नहीं है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *