रांची में घर बनाने से मुश्किल उसका नक्शा पास कराना है। नगर निगम की स्थिति ऐसी हो गई है कि यहां हाईकोर्ट के आदेश का भी पालन नहीं होता है। हाईकोर्ट ने नक्शा पास करने में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए पुरानी व्यवस्था के तहत नक्शा पास करने का निर्देश दिया है। लेकिन निगम में अभी भी नक्शा के आवेदन की लीगल जांच की प्रक्रिया नहीं बदली है। निगम में नव नियुक्त लीगल एडवाइजर को लीगल जांच की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन अनुभव नहीं होने की वजह से वे काम नहीं कर पा रहे हैं। इसका नतीजा है कि आम लोगों के घरों के नक्शा के आवेदन पिछले छह माह से पेंडिंग हैं। निगम में विभिन्न स्तर पर करीब 350 भवनों के नक्शे पेंडिंग हैैं। इसमें सबसे अधिक 170 लीगल जांच में फंसे हुए हैं। लीगल जांच नहीं होने की वजह से आवेदक काफी परेशान हैं। दर्जनों आवेदक या आर्किटेक्ट नक्शा शाखा के पदाधिकारियों से मिलने निगम आते हैं, फिर निराश होकर लौट जाते हैं। जबकि, पहले लीगल जांच में आवेदकों की फाइल नहीं रुकती थी। इसलिए हाईकोर्ट ने भी लीगल जांच में पुरानी व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया है।


