रांची सदर अस्पताल में गर्भवती को एंबुलेंस से उतारकर इमरजेंसी तक पैदल ले जाने पर हाईकोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने सोमवार को कहा-अस्पताल में ऐसी अव्यवस्था गंभीर मामला है। भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए सरकार क्या कदम उठाएगी, इसकी विस्तृत जानकारी दें। मामले की अगली सुनवाई अब 11 सितंबर को होगी। इस मामले को दैनिक भास्कर ने प्रमुखता से उठाया था। कोर्ट ने भास्कर की खबर पर स्वत: संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका में तब्दील कर दिया था। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि उस दिन अस्पताल परिसर में पाथवे पर गाड़ियां खड़ी थीं। इसी वजह से एंबुलेंस अंदर नहीं जा सकी। मरीज को एंबुलेंस से उतारकर पैदल ले जाया गया। यहां की पार्किंग की व्यवस्था निजी कंपनी के पास है। कंपनी को सख्त निर्देश दिया गया है कि भविष्य में ऐसी घटना न हो, यह सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि अस्पताल में स्ट्रेचर और ट्रॉली उपलब्ध रहती है। ऐसी घटनाएं अक्सर नहीं होती। सड़क पर जाम नहीं लगता है। भास्कर ने उठाया था मुद्दा रांची सदर अस्पताल में गर्भवती को पैदल इमरजेंसी तक ले जाने का मामला बिजली खंभों पर झूलते तारों पर भी मांगा जवाब शहर में खंभों पर झूलते तारों से संबंधित मीडिया रिपोर्ट पर भी हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने इस मामले में जेबीवीएनएल को प्रतिवादी बनाते हुए जवाब मांगा। सरकार की ओर से बताया गया कि मोबाइल कंपनियां बिना अनुमति के बिजली के खंभे पर तार लटकाकर छोड़ देती है। इस पर कोर्ट ने पूछा कि ऐसे मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई। अगली सुनवाई पर एक सितंबर को जवाब दें।


