हाईकोर्ट ने नाबालिग को माता-पिता संग रहने की अनुमति दी:हाईकोर्ट ने हैबियस कॉर्पस याचिका निपटाई, ‘शौर्य दीदी’ करेंगी मार्गदर्शन

ग्वालियर हाईकोर्ट की युगल पीठ ने एक हैबियस कॉर्पस याचिका का निपटारा किया है। कोर्ट ने नाबालिग बेटी को उसके माता-पिता के साथ रहने की अनुमति दी। साथ ही, उसके मानसिक और भावनात्मक संरक्षण के लिए एक साल तक ‘शौर्य दीदी’ नियुक्त करने का निर्देश दिया गया है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी को संदीप बंजारा ने अवैध रूप से अपने पास रखा है। सुनवाई के दौरान पुलिस ने बालिका को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। अदालत ने बालिका से सीधे बातचीत की। मर्जी से गई थी संदीप के पास रहने बालिका ने बताया कि परिवार द्वारा विवाह तय किए जाने के बाद वह संदीप बंजारा के संपर्क में आई और उसे पसंद करने लगी थी। पारिवारिक असहमति के कारण रिश्ता टूट गया, जिसके बाद वह अपनी इच्छा से राजस्थान के बारा जिले चली गई थी। बालिका ने कोर्ट को बताया कि वह 18 की आयु पूरी होने तक माता-पिता के साथ रहना चाहती है और अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती है। उसने यह आशंका भी व्यक्त की कि भविष्य में माता-पिता उसकी इच्छा से विवाह के लिए सहमत न हों। मां ने बेटी की इच्छा पर विवाह का दिया आश्वासन इस पर बालिका की मां ने न्यायालय को आश्वस्त किया कि 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने के बाद बेटी की इच्छा के अनुसार विवाह पर विचार किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि उसे किसी भी प्रकार से प्रताड़ित नहीं किया जाएगा। न्यायालय ने थाना घाटीगांव की महिला आरक्षक प्रीति बिलवाल को एक वर्ष के लिए ‘शौर्य दीदी’ नियुक्त किया। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमित रूप से बालिका से संपर्क करें, उसका मार्गदर्शन करें, काउंसलिंग करें और उसे शिक्षा व रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने में सहयोग दें।

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