बस्सी बार एसोसिएशन के आगामी चुनावों में रेवेन्यू कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं को शामिल नहीं करने के मामले में आज हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस संजीत पुरोहित की बैंच ने मामले में सुनवाई करते हुए बार के अध्यक्ष, महासचिव सहित चुनाव समिति के पदाधिकारियों को तलब किया है। अदालत ने यह आदेश बार के जॉइंट सैक्रेटरी विकास कुमार व अन्य अधिवक्ताओं की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। सभी को 4 दिसम्बर को हाईकोर्ट में पेश होना है। अधिवक्ता रामरख शर्मा ने बताया कि बार एसोसिएशन के आगामी चुनावों में रेवेन्यू कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं को शामिल नहीं किया जा रहा है। उनके शपथ पत्र नहीं लिए जा रहे है। जिससे वे चुनाव लड़ने और वोट कास्ट करने से वंचित हो रहे हैं। अधिवक्ताओं के दो गुटों में हुआ था झगड़ा दरअसल सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर राजस्थान में बार चुनावों में ‘वन बार,वन वोट’ की नीति लागू की गई है। जिसके तहत प्रत्येक वकील को चुनाव से पहले शपथ पत्र देकर यह बताना होगा कि वह किस बार में वोट देना चाहता हैं। अधिवक्ता जिस बार का शपथ पत्र देंगे, वे केवल उसी बार की चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा ले सकते हैं। याचिका में कहा गया कि रेवेन्यू कोर्ट की कोई रजिस्टर्ड बार नहीं है। ऐसे में वकील बस्सी बार एसोसिएशन में ही सालों से शामिल हो रहे है। पिछले चुनावों में भी सभी अधिवक्ता बार एसोसिएशन के चुनावों में शामिल हुए थे। लेकिन अब बार के अध्यक्ष, महासचिव और चुनाव अधिकारी उन्हें शामिल नहीं कर रहे हैं। इसे लेकर वकीलों के दो गुटों में कुछ दिन पहले झगड़ा भी हो चुका हैं।


