हाईकोर्ट ने 27 साल पहले हुई हत्या मामले में आजीवन कारावास के सजायाफ्ता चार आरोपियों को किया बरी

झारखंड हाईकोर्ट ने 27 साल पहले हुई हत्या के एक मामले में आजीवन कारावास के सजायाफ्ता चार आरोपियों को बरी कर दिया। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अरुण कुमार राय की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए निचली अदालत द्वारा दी गई आजीवन कारावास की सजा को रद कर दिया। यह मामला बेड़ो थाना अन्तर्गत करगे गांव का है। वर्ष 1998 में केश्वर साहू आरोपियों ने धारदार हथियार से हमला कर उसकी हत्या कर दी। इस मामले में बेड़ो थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। मृतक के पुत्र राजेंद्र साहू ने स्वयं को प्रत्यक्षदर्शी बताते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी। हत्या का मूल कारण भूमि विवाद बताया गया था। निचली अदालत ने 18 अप्रैल 2000 को मामले की सुनवाई करने के बाद हत्या के आरोपी राजेन्द्र उरांव, बरिया उरांव, रामधन उरांव और भनुआ उरांव को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके खिलाफ आरोपियों ने हाईकोर्ट में क्रिमिनल अपील दाखिल की। अदालत ने सजायाफ्ता राजेंद्र उरांव एवं भनुआ उरांव की सजा के खिलाफ क्रिमिनल अपील की सुनवाई के दौरान पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। अदालत ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ साझा इरादा साबित करने के लिए ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए। केवल पारिवारिक दुश्मनी के आधार पर दोषसिद्धि नहीं की जा सकती है। सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने निचली अदालत के निर्णय को रद्द कर दिया और सभी आरोपियों को आपराधिक दायित्व से मुक्त कर दिया। चंूकि आरोपी पहले से जमानत पर थे, इसलिए उनकी जमानत बांड भी समाप्त कर दी गई।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *