हाईकोर्ट बोला-2046 तक देश में बच्चों से ज्यादा बुजुर्ग होंगे:राजस्थान के सभी वृद्धाश्रमों की ऑडिट होगी, खाने की क्वालिटी से लेकर हर सुविधा जांची जाएगी

राजस्थान के सभी 31 वृद्धाश्रमों (ओल्ड एज होम) की जांच होगी। वहां रहने वाले बुजुर्गों को मिलने वाली सुविधाओं की हकीकत सामने आएगी। बुजुर्गों को मेडिकल की सुविधा मिल रही है कि नहीं, खाने की क्वालिटी, बिल्डिंग की स्थिति, साफ-सफाई से लेकर सुरक्षा के इंतजाम कैसे हैं, इन सब बिंदुओं पर हाईकोर्ट ने 15 फरवरी तक रिपोर्ट तलब की है। कोर्ट ने नाराजगी जताई
राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच ने यह जिम्मेदारी राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और सभी जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों को दी है। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि 2046 तक देश में बच्चों से ज्यादा बुजुर्ग होंगे। इसके लिए हमारा सिस्टम तैयार नहीं है। बेंच ने लोक उत्थान संस्थान की जनहित याचिका पर सुनवाई की। जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संगीता शर्मा की डिवीजन बेंच ने राजस्थान में ओल्ड एज होम्स (वृद्धाश्रमों) की स्थिति को लेकर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने साफ कहा कि ये आश्रम सिर्फ कागजी औपचारिकता नहीं हो सकते, बल्कि यहां रहने वाले बुजुर्गों को सम्मान, बेहतर चिकित्सा, सुरक्षा और मानवीय गरिमा के साथ जीने का हक मिलना चाहिए। कोर्ट ने कहा- आधुनिक समाज ने बुजुर्गों को उपेक्षित बनाया
कोर्ट ने भारतीय संस्कृति का जिक्र करते हुए कहा कि हमारे यहां बुजुर्गों को भगवान का दर्जा दिया जाता है, लेकिन आधुनिक समाज में संयुक्त परिवारों का टूटना, शहरीकरण और बदलती जीवनशैली ने उन्हें असहाय और उपेक्षित बना दिया है। कोर्ट ने कहा- वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल अब सिर्फ परिवार की नैतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि संवैधानिक जिम्मेदारी है। जनहित याचिका में वृद्धाश्रमों की खराब स्थिति को लेकर सवाल उठाए गए थे। बुनियादी सुविधाओं की कमी और लापरवाही का आरोप लगाया गया है। बुजुर्गों की संख्या बढ़ने से कोर्ट चिंतित
अदालत ने कहा कि देश में बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कोर्ट ने इस पर चिंता जताते हुए इसे ‘खतरे की घंटी’ बताया। विभिन्न रिपोट्‌र्स का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि 2022 में बुजुर्गों की आबादी कुल जनसंख्या का करीब 10.5% थी, जो 2050 तक 20% से ज्यादा हो सकती है। देश में 2046 तक बुजुर्गों की संख्या बच्चों से भी ज्यादा होगी। ऐसे में अगर अभी से ठोस व्यवस्था नहीं की गई, तो भविष्य में यह स्थिति सामाजिक संकट का रूप ले सकती है। प्रदेश में 31 वृद्धाश्रम चल रहे
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि राजस्थान में 31 वृद्धाश्रम चल रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ संख्या बताना काफी नहीं, वहां बुजुर्गों के लिए किस तरह की व्यवस्था है, यह देखना भी जरूरी है। संस्थान की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता नितिन सोनी ने कोर्ट को बताया कि सरकार की लिस्ट में कई पुनर्वास केंद्रों को भी वृद्धाश्रम बताकर शामिल किया गया है, जबकि वास्तव में इतने आश्रम संचालित नहीं हो रहे। ————————– हाईकोर्ट की यह खबर भी पढ़िए…. हाईकोर्ट ने कहा- ‘नीच’ शब्द कहना जातिसूचक गाली नहीं : IIT जोधपुर के डायरेक्टर और प्रोफेसर के बीच हुई मारपीट के केस से धाराएं हटाई राजस्थान हाईकोर्ट ने आईआईटी जोधपुर के डायरेक्टर और एसोसिएट प्रोफेसर के बीच हुए विवाद के केस में कहा कि ‘नीच’ कहना मात्र जाति के आधार पर अपमान नहीं माना जा सकता। जस्टिस संदीप शाह की एकलपीठ ने डॉ. दीपक अरोड़ा की याचिका पर सुनवाई करते हुए एससी/एसटी एक्ट के तहत आपराधिक कार्रवाई को रद्द कर दिया। (पूरी खबर पढ़ें)

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