हार्ट अटैक आने पर एंटीकोटेड इकोस्प्रिन दवाई जीभ के नीचे रखने के बारे में सभी जानते हैं। लेकिन डॉक्टर्स कहते हैं कि इसकी जगह डिस्प्रिन को क्रश करके हार्ट अटैक के मरीज को देने पर उसका परिणाम बेहद जल्दी सामने आता है। जयपुर में शुरू हुई स्टेट लेवल कॉन्फ्रेंस ‘सीएमसीएच कॉन्क्लेव 2025’ में एक्सपर्ट्स ने कुछ ऐसी ही जानकारी दी। कॉन्फ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. रोहित चोपड़ा ने बताया कि डॉ. सीएम चोपड़ा हॉस्पिटल की ओर से आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में हृदय रोग के खतरे को बढ़ाने वाले अलग-अलग फैक्टर्स पर बात की गई। यह पहला मौका है जब चौमू जैसे शहर में फिजिशियन और युवा कार्डियोलॉजी विशेषज्ञों को इलाज में आ रही नवीनतम जानकारी प्राप्त करने का एक प्लेटफॉर्म मिला।
इस दौरान विशेषज्ञों ने अपने सत्रों के हार्ट डिजीज की हालिया स्थिति और गंभीरता के बारे में चर्चा की। इस दौरान डॉ. राहुल शर्मा, डॉ. दीपेंद्र भटनागर, डॉ. प्रेम रतन डेगावत ने लिपिड लोअरिंग, डॉ. सीबी मीणा ने मॉर्डन कार्डियोलॉजी में पीसीआई और बायपास, डॉ. गौरव सिंघल ने लोकल मैनेजमेंट पर सेशन दिया।
एंटीकोटेड इकोस्प्रिन को असर दिखाने में लगता 2:30 घंटे का समय
सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. दीपेंद्र भटनागर ने बताया कि एंटीकोटेड इकोस्प्रिन को शरीर में घुलने में समय लगता है। इसके कारण इसका असर दिखाने में ढाई घंटे से ज्यादा समय लगता है। ऐसे में मरीज को डिस्प्रिन दवाई को तोड़ कर चूरा करके देनी चाहिए जिससे तुरंत उसका असर देखने को मिलता है। डॉ. रोहित चोपड़ा ने बताया कि अब हर ब्लॉकेज में एंजियोप्लास्टी के दौरान स्टेंटिंग करने की आवश्यकता नहीं है। इसके लिए अब ड्रग इल्यूटिंग बैलूनोप्लास्टी कर सकते हैं। इसमें दवाओं से लिपटा बैलून ब्लॉकेज वाली जगह फुलाया जाता है जिससे कुछ देर में ब्लॉकेज खत्म हो जाता है और मरीज को स्टेंट लगाने की जरूरत नहीं होती और उसे बाद में खून पतला करने की दवाएं लेने को भी जरूरत नहीं होती।


