श्री मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति, इंदौर ने कालजयी साहित्यकार पुण्य स्मरण श्रृंखला के 95वें पुष्प में वीरगाथाकाल के महान कवि चंद बरदाई को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में प्रचारमंत्री हरेराम वाजपेयी ने बताया कि चंद बरदाई अजमेर के चौहान वंश के राजपुरोहित थे, जिन्होंने बचपन से ही संस्कृत, साहित्य, व्याकरण, छंद, पुराण और ज्योतिष में महारत हासिल की थी। उन्होंने युद्ध कौशल में भी निपुणता प्राप्त की थी, जिसके कारण वे पृथ्वीराज चौहान के न केवल मित्र बने बल्कि जीवन की अंतिम घड़ी तक उनके साथ रहे। मोहम्मद गौरी के विरुद्ध उनकी प्रसिद्ध रणनीति ‘चार बांस चौबीस गज’ ने इतिहास में अमिट छाप छोड़ी। डॉ. अखिलेश राव ने उन्हें वीर गाथाकाल का महान कवि बताया। अरविंद जोशी ने पृथ्वीराज, जयचंद और मोहम्मद गौरी के ऐतिहासिक त्रिकोणीय संघर्ष पर प्रकाश डाला। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति डॉ. निशा दुबे ने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि इस कार्यक्रम से उनका ज्ञानवर्धन हुआ। कार्यक्रम में कार्यवाहक प्रधानमंत्री घनश्याम यादव, अर्थमंत्री राजेश शर्मा सहित कई प्रतिष्ठित साहित्यकार और बुद्धिजीवी उपस्थित थे। दिनेश दवे और अरुणिमा राने ने कहा कि ऐसे साहित्यकारों के बारे में जानकर देशभक्ति की भावना और प्रबल होती है।


