हिमाचल में SHO-DSP की मीडिया ब्रीफिंग पर पाबंदी:SP-DIG ही अधिकारिक बयान देंगे; पुलिस की SOP पर विवाद गहराया, DGP की सफाई

हिमाचल प्रदेश पुलिस में मीडिया से संवाद को लेकर जारी नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) पर विवाद गहरा गया है। पुलिस महानिदेशक (DGP) ने एक सर्कुलर जारी करते हुए कहा कि अब क्राइम, कानून-व्यवस्था, जांच और पुलिस नीतियों से जुड़े मामलों पर केवल जिला के एसपी व रेंज के डीआईजी ही मीडिया से औपचारिक बातचीत कर सकेंगे। इसके लिए भी जरूरत पड़ने पर पुलिस मुख्यालय से पूर्व अनुमति लेनी होगी। डीजीपी की ओर से जारी सर्कुलर में साफ किया गया कि सब-डिवीजनल पुलिस अधिकारी (SDPO) और थाना प्रभारी (SHO) किसी भी परिस्थिति में मीडिया को बयान नहीं देंगे और न ही किसी तरह की प्रतिक्रिया, इंटरव्यू या ब्रीफिंग करेंगे। यानी अब किसी भी चोरी, डकैती, लूटपाट, एक्सीडेंट जैसे मामले की SHO-DSP पुष्टि नहीं करेंगे। छोटे-छोटे क्राइम के लिए SP और रेंज IG से संपर्क करना होगा। किन कानूनों का दिया गया हवाला डीजीपी के आदेश में स्पष्ट किया है कि सीसीएस (कंडक्ट) Rules, 1964, हिमाचल प्रदेश पुलिस अधिनियम, 2007 और पंजाब पुलिस नियम, 1934 के अनुसार बिना अनुमति मीडिया से बातचीत करना अनुशासनहीनता माना जाएगा। बता दें कि SDPO पद पर ज्यादातर HPS और IPS रैंक के अधिकारियों को लगाया जाता है। यानी विभाग को HPS और IPS रेंक अधिकारियों पर भी भरोसा नहीं है। मीडिया कर्मियों में रोष SP और IG को भी मीडिया में ब्रीफिंग से पहले पुलिस मुख्यालय से अनुमति लेनी होगी। इससे जो खबर आज और अभी मीडिया में आज आनी है, वह पुष्टि नहीं हो पाने की वजह से एक या दो दिन देरी से मिल पाएगी। या फिर आधी-अधूरी जानकारी के साथ अपुष्ट चलेगी। यही वजह है कि DGP के इन आदेशों मीडिया कर्मियों में रोष है। या फिर जिलों के एसपी और रेंज के डीआईजी को मीडिया में स्टेटमेंट देने से पहले पुलिस मुख्यालय से अनुमति लेनी होगी। सूचनाओं का गला घोंटने का प्रयास: संजीव वरिष्ठ पत्रकार संजीव शर्मा ने बताया- इन आदेशों से सूचना का प्रवाह रुकेगा। बहुत सी सूचनाएं सिर्फ खबर बनाने को नहीं होती, बल्कि पब्लिक को जागरूक करने के लिए होती है। मगर जब SHO-DSP बोलने को अधिकृत नहीं होंगे, तो सूचना कैसे आएगी? उन्होंने इन आदेशों को सूचनाओं का गला घोंटने वाला बताया। जितनी पाबंदी लगेगी, उतना नुकसान होगा: तोमर नेशनल कॉलमिस्ट, वरिष्ठ पत्रकार और लोक सेवा आयोग के पूर्व चेयरमैन केएस तोमर ने मीडिया को सूचना देने में जितनी पाबंदी लगाए जाएगी, उतना ही नुकसान सरकार और पुलिस को होगा। मीडिया में अपुष्ट व आधी-अधूरी जानकारी से खबरें छपेगी। उन्होंने बताया- अब ऑनलाइन एडिशन का जमाना है। अभी की खबर चंद मिनट में आ जाती है। ऐसे में पत्रकार एसपी से पुष्टि का इंतजार नहीं कर सकता। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि ऐसा नहीं करना तो दूसरे राज्यों की तर्ज पर यह सुनिश्चित किया जाए कि एसपी रोजाना दिन में दो बार मीडिया को ब्रीफ करें। DGP की सफाई डीजीपी अशोक तिवारी ने बताया- मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) में केवल इतना कहा गया कि वे SP की अनुमति के बिना नहीं बोलेंगे और अपराध या कानून एवं व्यवस्था से संबंधित मुद्दों के अलावा किसी अन्य विषय पर नहीं बोलेंगे। किसी भी स्थिति में, वे SP से प्रासंगिक और पेशेवर मुद्दों पर मीडिया से उचित और गरिमापूर्ण तरीके से बातचीत करने की अनुमति मांग सकते हैं, बशर्ते कि इससे जांच आदि में कोई बाधा न आए।

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