राजस्थान में हेल्थ सेक्टर की व्यवस्थाएं कितनी दुरस्त है ये खुद जिले में नियुक्त सीएमएचओ और डॉक्टर बता रहे है। कल देर शाम चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर की अध्यक्षता में हुई वीसी में जब एक जिले के सीएमएचओ से तैयारियों को लेकर पूछा तो उन्होंने जवाब दिया कि मेरे जिले में 64 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र (पीएचसी) ऐसी है जहां एक भी डॉक्टर नहीं है। सीएमएचओ की ये बात सुनकर मंत्री के होश उड़ गए। ये तब है जब 396 डॉक्टर मुख्यालय में मंत्री के पास एपीओ बैठे है। भले ही भजनलाल सरकार का सबसे ज्यादा फोकस इन दिनों हेल्थ को लेकर है। इसके लिए सरकार ने 13 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का बजट प्रावधान कर रखा है। लेकिन अधिकारियों की लापरवाही और मंत्री की नजरअंदाजी का नतीजा है कि सैंकड़ों डॉक्टर पिछले 2-3 माह से APO है बिना काम किए करोड़ों रुपए का वेतन उठा रहे है, लेकिन उनकी सेवाओं का लाभ आमजन को नहीं मिल पा रहा है। झुंझुनूं सीएमएचओ ने खोली पोल दरअसल मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने मौसमी बीमारियों और मौजूदा गर्मी के सीजन में हीटवेव से बचाव की तैयारियों को लेकर ये बैठक बुलाई थी। इसमें प्रदेश के सभी सीएमएचओ, जिला हॉस्पिटल अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज के प्रिसिंपल को जोड़ा था। बैठक में प्रमुख शासन सचिव गायत्री ए. राठौड़, मेडिकल एज्युकेशन सचिव अम्बरीश कुमार समेत तमाम अधिकारी मौजूद थे। सूत्रों के मुताबिक जब झुंझुनूं सीएमएचओ डॉ. छोटेलाल गुर्जर से उनके जिले की तैयारियों की जानकारी मांगी तो, डॉक्टर ने कहा, तैयारियां तो तब होगी जब यहां पीएचसी, सीएचसी में डॉक्टर होंगे। डॉक्टर ने बताया- उनके यहां 64 पीएचसी ऐसी है जहां एक भी डॉक्टर नियुक्त नहीं है। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि आखिरी इन पीएचसी में आने वाले मरीजों को आखिरी देख कौन रहा है। हर माह 5 करोड़ रुपए से ज्यादा का वेतन दे रहे एपीओ डॉक्टर्स को स्वास्थ्य विभाग में पिछले एक साल से रिकॉर्ड चल रहा है कि यहां हर समय 200 से 300 डॉक्टर्स 2- 3 माह या उससे ज्यादा समय तक एपीओ रहे है। इन डॉक्टर्स को सरकार एपीओ रहते हर माह 5 से 7 करोड़ रुपए का वेतन-भत्ते दे रही है। वैकल्पिक व्यवस्था कर रहे है झुंझुनूं सीएमएचओ डॉ. छोटे लाल गुर्जर ने बताया- जिन चिकित्सा संस्थान में डॉक्टरों के पद खाली पड़े है, उनमें वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए काम करवाया जा रहा है। हमे आश्वासन जल्द ही जिले में डॉक्टर्स की पोस्टिंग कर दी जाएगी।


