मैं नीलम रिटायर्ड होमगार्ड पुलिस कॉलोनी में रहती हूं। 18 मार्च 2025 को मुझे एलआईसी दफ्तर से लौटते वक्त रास्ते में दो औरतें मिलीं। बातों-बातों में उन्होंने मुझ पर जादू-टोना हुआ बताया तो मैं घबरा गई। वे मुझे कपूर अस्पताल की तरफ ले गईं। वहां 5 ग्राम की सोने की बालियां, 4 ग्राम की मुंदरी और एक छल्ला उतरवाकर फरार हो गईं। मैं सीधा पुलिस कोतवाली गई, शिकायत दी। वहां इंस्पेक्टर सुखविंदर ने मेरी शिकायत पर मुकदमा दर्ज नहीं किया। हर बार टालता रहा। बाद में बोला, मुकदमा दर्ज हो गया है। मैंने जब कॉपी मांगी, कभी प्रिंटर खराब तो कभी कहा गया मुलाजिम नहीं है। एक दिन मैंने मोबाइल पर वीडियो में वही महिला देखी। मैंने पता लगाया कि वह कपूरथला जेल में बंद है। मैं तुरंत थाने पहुंची। वहां कई एसएचओ बदल चुके थे। नए एसएचओ को मामले की जानकारी नहीं थी। मैंने बताया कि मेरी एफआईआर पहले से दर्ज है। तब मुझे मुंशी से पता चला, मुकदमा दर्ज ही नहीं किया गया था। मुझसे मानसिक दबाव में होने, सुधबुध नहीं होने का हवाला देकर तब मुकदमा दर्ज नहीं करवाने का बयान देने को कहा गया। मेरे इनकार पर अब कोतवाली थाने ने मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू की है। एसएचओ बलविंदर सिंह ने बताया, आरोपी को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। लेकिन पुराने एसएचओ ने मुकदमा क्यों नहीं लिखा, इसका कोई जवाब नहीं दिया।- मैं रिटायर्ड होमगार्ड हूं। अगर मुझसे ऐसा हुआ, तो आम आदमी के साथ क्या होता होगा? मेरा सवाल सिर्फ गहनों का नहीं है। सवाल भरोसे का है। सिस्टम से मिले इस धोखे का।


