भास्कर न्यूज | अमृतसर खालसा कॉलेज फॉर वुमन में चल रहे 10वें अमृतसर साहित्य उत्सव का समापन ‘चढ़िया बसंत कवि दरबार’ के साथ धूमधाम से हुआ। कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पंजाबी के प्रसिद्ध गजलकार विजय विवेक को नाद प्रगासु संस्था ने” नाद प्रगासु शब्द सम्मान’ से नवाजा। उन्हें 21 हजार रुपए नकद, सम्मान पत्र, लोई और पुस्तकों का सेट दिया गया। इस मौके पर विजय विवेक ने कहा कि सम्मान मिलने से साहित्यकार को अपने मन और चेतना को स्वच्छ रखने के लिए और अधिक प्रतिबद्धता प्रदर्शित करनी पड़ती है। यह मेरा व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि पंजाबी भाषा की उन्नति के लिए काम करने वाले कवियों और साहित्यकारों का सम्मान है। आज के कवी दरबार की अध्यक्षता करते हुए डॉ. मनमोहन ने कहा कि कविता केवल भावुकता और सहजता का प्रकटीकरण नहीं होती, बल्कि यह एक भाषाई हस्तक्षेप भी होती है, जिसमें सामाजिक और राजनीतिक ढांचे को बदलने की संभावना समाहित होती है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. सरबजोत सिंह बहल ने कहा कि कविता का दायरा व्यापक हो रहा है। कविता अब सहजता और छंदबद्धता से आगे बढ़ चुकी है। सोशल मीडिया के आगमन से कविता के अर्थविज्ञान का स्तर घटा है, जो हमारे नए संजीदा कवियों के लिए एक चुनौती है। कश्मीर से पहुंचे विशेष अतिथि कीरत सिंह इन्कलाबी ने कहा कि पंजाब और पंजाबी भाषा सदियों से अन्य भाषाओं और संस्कृतियों के साथ संबंध रखती आई है और अब यह एक वैश्विक भाषा बन चुकी है। ‘चढ़िया बसंत कवी दरबार’ भी डोगरी, गोजरी और पहाड़ी के कवियों को अपने में शामिल कर यही भूमिका निभा रहा है। आज के कवी दरबार की शुरुआत कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. सुरिंदर कौर के स्वागत भाषण से हुई। इसके बाद बसंत राग का वादन लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी फगवाड़ा के प्रो. गुरदीप सिंह ने सितार वादन के साथ किया। तत्पश्चात, बौदलां घराने के भाई सतिंदर सिंह ने बसंत राग का गायन किया। आज के कवी दरबार में सिमरत गगन, अमरीक डोगरा, जावेद रही, परमजीत सोहल, अमरजीत कसक, सुशील बेगाना, मुमताज चौधरी, भुपिंदर कौर प्रीत, स्वामी अंतर नीरव और भुपिंदर प्रीत ने अपनी रचनाएं उपस्थित श्रोताओं को सुनाईं। इस मौके पर डॉ. अमनदीप सिंह, डॉ. हलविंदर सिंह, डॉ. रेशम सिंह, प्रिंसिपल जसवंत सिंह, स्वर्ण सिंह, डॉ. रणजीत कौर, डॉ. अमरजीत कौर सहित जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, बिहार, हरियाणा और चंडीगढ़ से भी विद्यार्थी शामिल हुए।


