जिले में ‘पंच गौरव खेल हॉकी चयन स्पर्धा का आगाज 14 जनवरी से होने जा रहा है। प्रशासन जिला स्तर पर 150 खिलाड़ियों का चयन कर और 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर की तैयारियां की जा रही हैं, लेकिन जिला मुख्यालय के पास एक भी उपयुक्त हॉकी खेल मैदान तक नहीं है। जबकि कभी प्रदेश की हॉकी का गढ़ ब्यावर रहा है। पूर्व में ब्यावर की राजकीय बालिका स्कूल छावनी में कई राष्ट्रीय खिलाड़ी यहां से निकले हैं। 20 से अधिक तो शारीरिक शिक्षक के पद पर कार्य कर रही हैं। 1974 और 1978 में पीएम श्री राजकीय बालिका विद्यालय छावनी की 10 छात्राएं नेशनल खेल चुकी हैं। आज वही मैदान प्रशासन की अनदेखी के कमी के कारण बदहाल है। मैदान के बीचों-बीच कोर्ट बनाकर खेल बिगाड़ा : छावनी मैदान की दुर्दशा का मुख्य कारण गलत निर्णय हैं। मैदान के बीचों-बीच कबड्डी और वॉलीबॉल कोर्ट बनाने की कोशिश की गई, जिसका विरोध होने पर काम आधा ही छोड़ दिया गया। इससे मैदान के बड़े हिस्से में अब हॉकी, फुटबॉल या क्रिकेट खेलना असंभव हो गया है। शहर के राजकीय स्कूलों में मैदान नहीं : अधिकांश सरकारी स्कूलों के पास अपने खेल मैदान नहीं हैं। पटेल उच्च माध्यमिक विद्यालय सहित शाहपुरा मोहल्ला, बिचड़ली, अशोकनगर, और नर्सिंगपुरा स्कूल में मैदान नहीं हैं। अधिकांश खेल प्रतियोगिताएं सनातन धर्म राजकीय महाविद्यालय के मैदान में करानी पड़ती हैं।


