10 हजार रिश्वत लेना नजूल RI को पड़ा भारी:कोर्ट ने सुनाई 4 साल की सजा, सरगुजा में नामांतरण-रिकार्ड दुरुस्त करने मांगी थी घूस

सरगुजा में विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) ममता पटेल की अदालत ने रिश्वत लेने के मामले में दोषी पाए गए नजूल आरआई राजबहादुर सिंह को 4 साल की सजा सुनाई है। वहीं, पांच हजार रुपए अर्थदंड भी लगाया है। यह मामला अगस्त 2020 का है, जब सरगुजा एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने फुंदुरडिहारी पटवारी कार्यालय में ट्रैप कार्रवाई कर तत्कालीन नजूल आरआई राजबहादुर सिंह को 8 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। जमीन नामांतरण और रिकॉर्ड दुरुस्त करने के बदले मांगे थे पैसे शिकायतकर्ता अर्चना खाखा ने एसीबी से शिकायत की थी कि, उनके पति राकेश खाखा ने साल 2018 में अंबिकापुर के ठाकुरपुर इलाके में 0.04 हेक्टेयर जमीन खरीदी थी। जमीन का नामांतरण, नक्शा सुधार और रिकॉर्ड दुरुस्त करने के एवज में आरआई ने 10 हजार रुपए रिश्वत की मांग की थी। पहले 2 हजार लिए, बाकी के लिए बनाया दबाव जानकारी के अनुसार, आरआई ने जमीन की नाप कराने के बाद 10 हजार रुपए मांगे। अर्चना खाखा ने पहले 2 हजार रुपए दिए और बाकी रकम काम पूरा होने के बाद देने की बात कही। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले की शिकायत एसीबी सरगुजा से कर दी। ट्रैप कार्रवाई में 8 हजार लेते धराया 7 अगस्त 2020 को एसीबी की टीम ने योजना बनाकर ट्रैप बिछाया। फुंदुरडिहारी पटवारी कार्यालय में शिकायतकर्ता से 8 हजार रुपये लेते समय राजबहादुर सिंह को रंगे हाथों पकड़ लिया गया। गिरफ्तारी, निलंबन और फिर बहाली गिरफ्तारी के बाद आरोपी को जेल भेजा गया और विभाग ने उसे निलंबित कर दिया था। हालांकि जमानत पर रिहा होने के बाद उसका निलंबन वापस ले लिया गया और उसने दोबारा ड्यूटी ज्वाइन कर ली थी। अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर सुनाया फैसला एसीबी द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर विशेष न्यायालय ने मामले की सुनवाई पूरी की। बुधवार 28 जनवरी को फैसला सुनाते हुए अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया और सजा सुनाई।अदालत के इस फैसले को प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है।

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