झुंझुनूं के बीडीके अस्पताल के लिए मंजूर 100 बेड के क्रिटिकल केयर अस्पताल का काम एक साल बीतने के बाद भी शुरू नहीं हो पाया। इस अस्पताल के लिए एनएचएम पिछले साल अगस्त 2023 में राजमेस को 44.50 करोड़ का बजट दे चुका है। निर्माण नहीं शुरू होने को लेकर सामने आया है कि अस्पताल बनाने के लिए तय की गई जमीन को आरएसआरडीसी और पीडब्लूडी अधिकारियों ने उपयुक्त नहीं माना। इसके बाद दूसरी जगह अभी तय नहीं की गई। इस वजह से अस्पताल का निर्माण कराने के लिए एक साल पूरा होने पर भी टेंडर जारी नहीं हो पाया। बीडीके अस्पताल पीएमओ डॉ. राजवीर राव ने बताया- बीडीके में क्रिटिकल केयर ब्लॉक के लिए जगह तय नहीं होने से काम शुरू नहीं हो पाया। पहले यह यूनिट आई अस्पताल बननी थी, लेकिन अस्पताल बिल्डिंग बेहतर कंडीशन में होने के कारण पीडब्ल्यूड़ी ने तोड़ने मना कर दिया। अब नई जगह तय होने के बाद ही बनाई जाएगी। प्रदेश में सरकार बदलने के बाद अटक गया सीसीयू का काम नेशनल हेल्थ मिशन ने 26 अगस्त 2023 को बीडीके अस्पताल में गंभीर मरीजों के लिए 100 बेड के क्रिटिकल केयर अस्पताल के लिए मंजूरी देते हुए इसके लिए राजमेस को 44.50 करोड़ रुपए का बजट दिया था। राजमेस के साथ ही इसका निर्माण का जिम्मा आरएसआरडीसी को सौंपा गया। मंजूरी के बाद इसके लिए बीडीके अस्पताल की आई यूनिट परिसर व इसके साथ जुड़ी भूमि को इस अस्पताल के लिए तय किया था। जिसके बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की जानी थी। लेकिन विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में सरकार बदलने के बाद इसको लेकर आरएसआरडीसी ने अस्पताल के लिए जमीन कम होने की रिपोर्ट दी। दूसरी ओर सार्वजनिक विभाग के तकनीकी अधिकारियों ने आई यूनिट को तोड़ने की अनुमति देने से मना कर दिया। जिसके बाद अस्पताल का काम अटक गया। अब मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल भवन में बनाने तैयार किया प्रस्ताव अस्पताल का निर्माण नहीं होने को लेकर सामने आया कि आरएसआरडीसी ने नई जमीन तय करने का प्रस्ताव दिया। इसके लिए मेडिकल कॉलेज के लिए बनने वाले 270 बेड के नए अस्पताल में सबसे ऊपर फ्लोर पर इस सीसीयू अस्पताल के निर्माण कराने का प्रस्ताव भेजा गया। इसके पीछे तर्क ये दिया जा रहा है कि नई बिल्डिंग में एक फ्लोर पर अस्पताल बन जाने से खर्चा कम आएगा और एक साथ कार्य पूरा हो जाएगा। क्रिटिकल केयर ब्लॉक के लिए एनएचएम ने दिए थे 44.50 करोड़ रुपए नेशनल हेल्थ मिशन ने प्रदेश के सात जिलों में अगस्त 2023 में गहन चिकित्सा अस्पतालों को मंजूरी व बजट दिया था। इन सातों क्रिटिकल केयर ब्लॉक के लिए 187 करोड़ रुपए का बजट जारी हुआ था। इनमें झुंझुनूं, सिरोही, बारां, करौली जिलों व कोटा, बीकानेर, भरतपुर के मेडिकल कॉलेजों में सीसीबी के लिए बजट दिया गया। बीडीके में 100 बेड के क्रिटिकल केयर ब्लॉक व अन्य जिलों 50 बेड प्रति ब्लॉक को मंजूरी मिली थी। न्यूरो, ब्रेन हेमरेज व हार्ट रोगियों को मिलना था फायदा बीडीके में बनने वाले क्रिटिकल केयर ब्लॉक का सबसे ज्यादा फायदा न्यूरो सर्जरी, ब्रेन हेमरेज और हार्ट मरीजों को मिलना था। इसमें विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ क्रिटिकल केयर की विशेषज्ञता वाले नर्सिंग स्टाफ की नियुक्ति होनी थी। इसमें ब्रेन हेमरेज, न्यूरो डिसआर्डर, पैरालिसिस, इंटरनल ब्लीडिंग व हार्ट के गंभीर मरीजों को स्थानीय स्तर पर इलाज की सुविधा मिलनी थी। अभी तक तय नहीं हो पाई सीसीयू की जगह मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट करने का प्रस्ताव भी बनाया बीडीके में 100 बेड का क्रिटिकल केयर ब्लॉक को लेकर जगह तय नहीं हो पाई है। पीडब्लूडी अधिकारियों ने पूर्व में तय की गई जमीन को इसके लिए उपयुक्त नहीं माना। उनका तर्क था कि इसके लिए 6 हजार स्क्वायर जमीन की जरूरत पड़ेगी। इसको लेकर उन्होने मेडिकल कॉलेज परिसर में इसे बनाए जाने का प्रस्ताव दिया। बीडीके अस्पताल में आपात यूनिट और ऑपरेशन थियेटर में मरीज सीरियस होने की वजह बताते हुए इसे वहीं बनाए जाने का प्रस्ताव दिया गया है। इसकी वजह से इसके निर्माण को लेकर पूरा मामला अटका हुआ है।


