हल्दीराम मूलचंद हार्ट हॉस्पिटल में जन्मजात हृदय रोगी से पीड़ित 11 मरीजों के हृदय के छेद आधुनिक डिवाइस क्लोजर तकनीक से बंद किए गए हैं। मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत 13 और 14 जनवरी को आयोजित विशेष कैंप में इन मरीजों को इलाज किया गया। हृदय के छेद बंद करने का खर्च प्राइवेट अस्पतालों में करीब दो लाख रुपए तक आता है। इन मरीजों नई दिल्ली एम्स और मेदांता जैसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में जाने की जरूरत नहीं पड़ी। हृदय रोग विभाग के एचओडी डॉ. पिंटू नाहटा ने बताया कि हृदय में छेद के कारण छह से 40 वर्ष तक के मरीज काफी समय से परेशान थे। विशेष कैंप लगाकर उनका इलाज निशुल्क किया गया है। प्रक्रिया इतनी उन्नत और कम इनवेसिव थी कि अधिकांश मरीजों को केवल एक दिन अस्पताल में रखा गया। पारंपरिक ओपन हार्ट सर्जरी में छाती पर बड़ा चीरा लगता था। 10-15 दिन अस्पताल में रहना पड़ता था। लंबे समय तक बेड रेस्ट करना होता था। टीम में शामिल विशेषज्ञ : कैंप में मुख्य भूमिका डॉ. पिंटू नाहटा, डॉ. दिनेश चौधरी, डॉ. सुनील बुडानिया, डॉ. रामगोपाल कुमावत, डॉ. राजवीर बेनीवाल की रही। मुंबई के विशेषज्ञ डॉ. भूषण की देखरेख में स्थानीय टीम ने प्रक्रिया पूरी की। इस दौरान एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. कांता भाटी एवं टीम का भी विशेष सहयोग रहा। तकनीकी टीम में राकेश सोलंकी (कैथ लैब इंचार्ज), पंकज तंवर, जय सिंह, सुमित्रा, शिवम गहलोत एवं नर्सिंग इंचार्ज सीताराम तथा उनकी टीम का सहयोग रहा।


