11 रूटों पर चलने वाली निजी बसों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी, रोडवेज का यात्री भार बढ़ा

आरटीओ (राजस्थान) की ओर से निजी बसों के विरुद्ध की जा रही कार्रवाई व लगाए जा रहे जुर्मानों के विरोध में अखिल राजस्थान कांटेक्ट कैरिज बस एसोसिएशन के आह्वान पर हड़ताल लगातार दूसरे दिन भी जारी रही। बाड़मेर के सभी निजी बस ऑपरेटरों ने हड़ताल का समर्थन करते हुए दूसरे दिन पूरी तरह से बसों का संचालन बंद कर दिया। बुधवार को बाड़मेर से 11 रूटों पर संचालित होने वाली बसों के पहिए थमे रहे। वहीं ग्रामीण रूट पर चलने वाली बसों का संचालन भी पूरी तरह से बंद रहा। हड़ताल के कारण यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बसें बंद होने से रोडवेज बसों व ट्रेनें फुल हो गई। बाड़मेर से बड़े शहरों के लिए ट्रेन से सीधी कनेक्टिविटी नहीं होने के कारण यात्री परेशान हुए। बाड़मेर से अहमदाबाद, जयपुर, उदयपुर, बैंगलोर, सूरत, राजकोट, गांधीधाम व दिल्ली जैसे लंबी दूरी के शहरों के लिए निजी बसें बंद होने से लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। बस एसोसिएशन के कड़े रुख के कारण बाड़मेर से संचालित होने वाले सभी मुख्य रूटों पर बसों का संचालन ठप रहा। शहर से विभिन्न राज्यों और जिलों को जोड़ने वाली 65 से अधिक निजी बसों के साथ साथ ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाली बसों का संचालन भी बंद रहा। आलम यह था कि बुधवार को बाड़मेर से किसी भी शहर के लिए नई बुकिंग नहीं हो सकी। निजी बसों के बंद होने का सीधा असर रोडवेज की बसों और रेलवे पर देखने को मिला। बाड़मेर से संचालित होने वाली रोडवेज बसें सुबह से ही खचाखच भरी रहीं, वहीं ट्रेनों में भी पैर रखने की जगह नहीं मिली। सबसे बड़ी समस्या उन शहरों के लिए पैदा हुई जहां बाड़मेर से सीधी ट्रेन या रोडवेज सेवा उपलब्ध नहीं है। सूरत, राजकोट, गांधीधाम, उदयपुर व बेंगलुरू जैसे महानगरों के लिए रोडवेज की एक-दो बसें होने के कारण यात्रियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी।

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