11 लोगों को बचाने वाले पुलिसकर्मी सम्मानित:पंजाब के बठिंडा में नहर में गिरी थी कार, कावडिया कृष्णा बोला- उनके बाद आई थी पुलिस

पंजाब के बठिंडा में दो दिन पहले एक कार बेकाबू होकर नहर में गिर गई थी। कार सवार सभी 11 लोगों को सकुशल बचा लिया गया था। इस ऑपरेशन को अंजाम देने वाले पुलिस जवानों को डीजीपी से लेकर सीएम भगवंत मान ने सम्मानित किया गया है। हालांकि, इस कार को बचाने के लिए सबसे पहले नहर में कूदने वाले कृष्णा नाम के कावड़िए को अभी तक किसी ने नहीं पूछा है। जब पुलिस अधिकारियों को चंडीगढ़ में सम्मानित किया तो मीडिया ने एसएसपी अमनीत कौंडल से इस बारे में पूछा। उन्होंने बताया कि सूचना मिलने के बाद तुरंत पुलिस पहुंच गई थी। पुलिस के पहुंचने से पहले ही वहां पर लोग उन्हें बचाने में लगे हुए थे। इन्होंने जान जोखिम में डालकर लोगों की जान बचाई थी। इसलिए सम्मानित किया गया। पंद्रह अगस्त को इन्हें सीएम मैडल दिया जाएगा। वहीं, सबसे पहले पहुंचने वाले कृष्णा को हमारे डीसी ने बुला लिया है। एक और अन्य व्यक्ति का पता चला है। उसे भी बुलाया गया, इन्हे सम्मानित किया जाएगा। पुलिस मुलाजिमों ने कहानी मीडिया बताई चंडीगढ़ में सीएम द्वारा सम्मानित होने वाले पीसीआर कर्मी नरेंद्र सिंह ने बताया कि उस दिन वह सुबह ड्यूटी पर थे। एक आदमी आया और कहा कि नहर में गाड़ी गिर गई है, अगले दो मिनट में हम वहां पहुंच गए। मैंने छलांग लगा दी। मेरे पीछे साथी जसवंत ने भी छलांग लगा दी। हालांकि जसवंत को तैरना भी नहीं आता था मैंने पिछला शीशा तोड़कर पहले बच्चे को निकाला, इसके बाद दो महिलाओं को निकाला। हमारी टीम बाहर मौजूद थे। रस्सी के जरिए सबको बाहर निकाला। इस दौरान बच्चे के पेट से पानी निकाला गया। जसवंत सिंह ने कहा, “अगर मेरी जगह कोई भी होता, तो मेरे जैसे ही करता।” हालांकि, मुझे तैरना नहीं आता था, नहर पानी तेज था। ऐसे में खुद को बड़ी मुश्किल से संभाला। हमें बहुत खुशी है कि सीएम ने हमें सम्मानित किया। पुलिस के साथ ही जनता भी मदद के लिए आई नहर में सबसे पहले कार सवारों को बचाने के लिए छलांग लगाने वाले कृष्णा ने बताया कि वह हरिद्वार से कावड़ के माध्यम से जल लेकर आ हरे थे। वह पेशे से ड्राइवर है और बठिंडा में ही काम करते है। हालांकि मूलरूप से बिहार के रहने वाले है। कृष्णा ने बताया कि वह 23 तारीख हरिद्वार से जल लेकर आ रहा था। तभी उन्हें गाड़ी नहर में तैरती हुई नजर आई। नहर के आसपास कोई दिख नहीं रहा था । मैने गाड़ी खड़ीकर नहर में छलांग लगा दी। जब मैं कार के पास पहुंचा, तो मैंने उन्हें निकालना शुरू कर दिया। जब उनसे पूछा गया कि पीसीआर कितनी देर बाद आई तो जवाब था कि पंद्रह मिनट बाद आई थी। बाद में एक मुलाजिम मेरे साथ मदद के लिए था। इसके बाद काफी लोग वहां जुट और लोगों को बचाने में जुट गए। लोगों के जुटने के बाद मैं भी निकल गया था। क्योंकि मुझे गंगाजल शिवजी को अर्पित करना था । मेरे दिल को सुकून है कि सभी की जान बच गई। कृष्णा से जब पूछा गया कि सभी पुलिस मुलाजिमों को सम्मानित किया गया, लेकिन आपको नहीं। इस पर कृष्णा का जवाब था, “दुख तो होता है, लेकिन ऊपर वाले की जो मर्जी है, मैं उससे खुश हूं।”

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