छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के आह्वान पर शुक्रवार को पूरे प्रदेश में कलमबंद–कामबंद आंदोलन का असर दिखा। राजधानी रायपुर से लेकर सरगुजा, बस्तर, बिलासपुर और दुर्ग तक सरकारी दफ्तरों में कामकाज ठप रहा। अधिकांश स्कूलों में ताले लटके रहे, तो नगरीय निकायों, विश्वविद्यालयों और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने छुट्टी लेकर आंदोलन में हिस्सा लिया। इंद्रावती भवन समेत नवा रायपुर स्थित कई शासकीय कार्यालयों में सन्नाटा छाया रहा। मोदी की गारंटी पुरी नहीं होने पर नाराज़गी फेडरेशन ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि मोदी की गारंटी योजना में सरकार ने कर्मचारियों से कई वादे किए थे। लेकिन कर्मचारियों के हित को सरकार नजर अंदाज कर रही है। आंदोलन के दौरान जगह–जगह कर्मचारियों ने “अब नई साहिबों, मोदी के गारंटी लेकर रहीबो” जैसे नारे लगाए। अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी 3 दिन पहले ही सरकार ने अधिकारी-कर्मचारी के लिए 2 प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ाया प्रदेश के अधिकारी-कर्मचारियों को केंद्र के बराबर 55 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिलेगा। लेकिन छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने कहा कि केंद्र के समान DA तो कर दिया गया, लेकिन उनकी 11 सूत्रीय मांगों पर अब तक विचार नहीं किया गया। फेडरेशन के संयोजक कमल वर्मा ने कहा कि मोदी की गारंटी अनुसार देय तिथि (ड्यू डेट) से महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) दिया जाए। कमल वर्मा ने आगे कहा कि DA एरियर्स की राशि कर्मचारियों के GPF खाते में समायोजित की जाए। जैसा मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार कर रही है। 11 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार से अब तक बात नहीं हो पाई है। कमल वर्मा ने कहा कि शासकीय सेवकों के लिए “मोदी की गारंटी” पर अमल किया गया तो तो कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान करेंगे।


