12दिन में 29लाख श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए:25 दिसंबर से 5 जनवरी तक मंदिर को ₹8.40 करोड़ की आय; 500 क्विंटल लड्डू प्रसाद भी बिका

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में नववर्ष और वर्ष के अंत में श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भीड़ दर्ज की गई। इस दौरान मंदिर को रिकॉर्ड आय प्राप्त हुई है। 25 दिसंबर 2025 से 5 जनवरी 2026 के बीच मंदिर को कुल 8 करोड़ 40 लाख रुपए की आमदनी हुई है। कुल 12 दिनों की अवधि में, लगभग 29 लाख 10 हजार भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन किए। श्रद्धालुओं की यह संख्या 25 दिसंबर, क्रिसमस के दिन से बढ़नी शुरू हुई, जब 2 लाख 57 हजार से अधिक भक्त मंदिर पहुंचे। इसके बाद 26 से 31 दिसंबर तक प्रतिदिन औसतन डेढ़ से दो लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए आते रहे। 31 दिसंबर को 1 लाख 53 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने महाकाल के दर्शन किए। नए साल पर पहुंचे सबसे ज्यादा भक्त नववर्ष के पहले दिन, 1 जनवरी को सर्वाधिक भीड़ दर्ज की गई, जब 6 लाख 12 हजार 879 श्रद्धालु महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे। यह 12 दिवसीय अवधि का सबसे बड़ा आंकड़ा था। इस दिन मंदिर परिसर, महाकाल लोक और आसपास के मार्गों पर भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। इसके बाद भी भीड़ का सिलसिला जारी रहा। 2 जनवरी को 2 लाख 73 हजार, 3 जनवरी को 2 लाख 19 हजार, 4 जनवरी को 2 लाख 46 हजार और 5 जनवरी को 2 लाख 14 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। 500 क्विंटल लड्डू बिका, मंदिर को 3 करोड़ की आय कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया कि 25 दिसंबर 2025 से 5 जनवरी 2026 के बीच शीघ्र दर्शन व्यवस्था मंदिर की आय का प्रमुख स्रोत रही। शीघ्र दर्शन टिकटों से मंदिर को लगभग 5 करोड़ 40 लाख रुपए की आमदनी हुई। नववर्ष के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कम समय में दर्शन के लिए इस सुविधा का लाभ उठाया, जिससे राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त, मंदिर में लड्डू प्रसाद वितरण से भी अच्छी आय प्राप्त हुई। कलेक्टर ने बताया कि इस अवधि में लगभग 500 क्विंटल लड्डू प्रसाद का वितरण किया गया, जिससे मंदिर को करीब 3 करोड़ रुपए की आय हुई। प्रसाद काउंटरों पर श्रद्धालुओं की लगातार मांग बनी रही और सभी व्यवस्थाएं सुचारु रूप से संचालित की गईं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर और जिला प्रशासन रहा सतर्क श्रद्धालुओं की भारी संख्या के मद्देनजर, मंदिर प्रशासन, जिला प्रशासन और पुलिस ने व्यापक व्यवस्थाएं की थीं। भस्म आरती से लेकर सामान्य दर्शन तक सुरक्षा, कतार प्रबंधन, जल आपूर्ति और स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया गया था।

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