शुभेंदु शुक्ला | अमृतसर अमृतसर को स्मार्ट सिटी मिशन बनाने का सपना 2016 में दिखाया गया था, जो आज तक तक अधूरा है। केंद्र सरकार दी गई ग्रांट से काम करवाने की डेडलाइन तीन बार पहले बढ़ा चुकी है और अब 31 मार्च को चौथी समयसीमा भी खत्म हो जाएगी। मगर स्मार्ट सिटी के 44 में से 12 (27%) प्रोजेक्ट अभी भी अधूरे हैं। इनमें किसी का 90 तो कोई 10 प्रतिशत काम बाकी है। 2016 में शहर को स्मार्ट सिटी बनाने की लिस्ट में डालने के बाद 2018 में पहले प्रोजेक्ट काम शुरू हुआ था। अब स्मार्ट सिटी के तहत 980 करोड़ रुपए शहर को मिले हैंं। इनमें 490 केंद्र तो 490 राज्य सरकार के हैं। इनमें से 255 करोड़ खर्च करके 32 छोटे-बड़े प्रोजेक्ट पूरे किए गए हैं। वहीं 613 करोड़ रुपए के 12 बड़े प्रोजेक्ट अभी भी अधूरे हैं। इसके अलावा 112 करोड़ ख्रर्च करने की अभी तक रूपरेखा तैयार नहीं हुई, इसलिए इस रकम के लैप्स होने का खतरा 31 मार्च से पैदा हो जाएगा। इनमें 50 करोड़ ऑफिस खर्चे के लिए हैं और 62 करोड़ की योजनाएं अभी अप्रूवल के इंतजार में हैं। 31 मार्च तक स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत जितना काम होना है, उसके लिए फंड का इस्तेमाल करना जरूरी है। अगर फंड खर्च नहीं हुआ तो वह लैप्स हो जाएगा। हालांकि, जो काम पहले ही शुरू हो चुके हैं, उन पर इसका असर नहीं पड़ेगा। 440 एमएलडी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का 375.29 करोड़ का प्रोजेक्ट 40 % काम अधूरा है। इसी तरह वाल्ड सिटी सर्कुलर रोड की रिडवलपमेंट का 119.81 करोड़ का प्रोजेक्ट 10 % गोलबाग में 5.07 करोड़ से बन रहे स्पोर्ट्स फैसिलिटी सेंटर का 10 % 46.66 करोड़ से बनाई जा रही मल्टीलेवल ऑटोमेटिक कार पार्किंग कैरों मार्केट 60 % और अमृतसर सरबत सेवा योजना के तहत 9.53 करोड़ से इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी, ट्रैफिक और टूरिज्म फैसिलिटीज देने का काम 70 प्रतिशत बाकी है। 6.85 करोड़ से गुरु नानक ऑडिटोरियम में इलेक्ट्रिकल और फर्नीचर का काम होना है, जो 80 % रहता है। 14.16 से डीबीएम बीसी, बीएम और इंटरलॉकिंग पेवर ब्लॉक और आरएमसी से जुड़े काम कराए जा रहे हैं, मगर यह भी 50% हो पाए हैं। 7.22 करोड़ से निगम के लिए वाहन खरीदे जाने थे, जो 25 प्रतिशत ही खरीदे गए हैं। डंप साइट के लिए 4.47 करोड़ से सुपर सकर मशीन खरीदी जानी थी। मगर अभी प्रक्रिया ही चल रही है। स्मार्ट क्लास रूम: 6.17 करोड़। एसएमएस आधारित कूपनिंग प्रणाली के साथ रिवर्स वेंडिंग मशीन: 2.54 करोड़। एलईडी स्ट्रीट लाइट्स: 34.22 करोड़। गार्बेज बकेट: 0.77 करोड़। डवलपमेंट पार्क फेस-1 (17 पार्क): 3.7 करोड़। ट्विन बिन हॉपर टिप्पर डम्पर और अपशिष्ट कंटेनर: 3.02 करोड़। फ्लाईओवर के नीचे खुले स्थानों का विकास (सिविल): 7.34 करोड़। एनएमटी इंफ्रास्ट्रक्चर पायलट प्रोजेक्ट: 1.98 करोड़। रिफ्यूज कलेक्टर और कॉम्पैक्टर: 2.09 करोड़। सीवर क्लीनर: 3.96 करोड़। स्वर्ण मंदिर तक जाने वाली सड़क: 6.91 करोड़। फायर फाइटिंग उपकरण की खरीद: 2.9 करोड़। कंस्ट्रक्शन और डिमॉलिशन मैनेजमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर: 2.61 करोड़। सेल्फ सर्विस टूरिस्ट कियोस्क: 3.99 करोड़। पार्कों और खुले स्थानों का विकास फेस-2: 5.03 करोड़। एरियल लैडर हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म की खरीद: 8.57 करोड़। कैनाल फ्रंट डवलपमेंट अपर बारी दोआब कैनाल: 6.17 करोड़। सी-एंड-डी प्रोसेसिंग प्लांट: 3.68 करोड़। लीकर पिकिंग मशीन: 0.92 करोड़। जंक्शन इंप्रूवमेंट: 11.89 करोड़। स्मार्ट स्ट्रीट: 0.85 करोड़। फुटओवरब्रिज का निर्माण: 1.34 करोड़। एलईडी स्ट्रीट लाइट फेस-2: 4.97 करोड़। इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर: 105.88 करोड़।


