सीधी के कुसमी क्षेत्र में स्थित हंस वाहिनी विद्या मंदिर भदौरा एक बार फिर विवादों में है। अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि पिछले तीन सालों से बच्चों और उनके माता-पिता को फीस जमा कराने के लिए लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। हाल ही में तकरीबन 100 अभिभावकों को नोटिस भेजे गए हैं, जिसमें कहा गया है कि फीस जमा न होने पर बच्चों को न तो परीक्षा में बैठने दिया जाएगा और न ही स्कूल आने दिया जाएगा। क्लास में बच्चों को फीस के लिए बार-बार टोका जाता है अभिभावकों के अनुसार, स्कूल प्रबंधन बच्चों को कक्षा में बार-बार टोकता है, जिससे बच्चे मानसिक तनाव में रहने लगे हैं। कई अभिभावकों का दावा है कि यह पूरा मामला वसूली का है और बिना पर्याप्त सुविधाएं दिए मोटी फीस वसूलने की कोशिश की जा रहा है। लोग बोले-स्कूल में बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं अभिभावक अनुरुद्ध जायसवाल ने बताया कि स्कूल में बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। खेल का मैदान लगभग न के बराबर है। कई शिक्षक रिकॉर्ड में एक नाम से दर्ज हैं, लेकिन पढ़ाने कोई और आता है। शिक्षकों से कम पैसों में काम करवाकर उनका भी शोषण किया जा रहा है। पीने के पानी और शौचालय की स्थिति भी मानकों के अनुरूप नहीं है। अभिभावकों ने सवाल उठाया कि जब स्कूल में सुविधाएं न के बराबर हैं, तो इतनी भारी-भरकम फीस क्यों वसूली जा रही है? 120 आरटीई छात्रों पर बनाया जा रहा फीस का दबाव सबसे बड़ी समस्या 120 आरटीई (शिक्षा का अधिकार) बच्चों से संबंधित है। इन बच्चों का प्रवेश सरकार के शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत हुआ है, जिनकी फीस का भुगतान सरकार की ओर से किया जाता है। हालांकि, 2022-23 का भुगतान अब तक स्कूल को नहीं मिला है। इसी आधार पर स्कूल प्रबंधन उन बच्चों के अभिभावकों पर भी फीस जमा करने का दबाव बना रहा है। आरटीई लाभार्थी परिवारों का कहना है कि वे नियमों के तहत आए हैं, इसलिए उनसे वसूली करना गलत और अवैध है।


