129 ग्राम स्मैक केस में 12 साल बाद फैसला:NDPS कोर्ट से तस्कर को 4 साल कैद, 50 हजार जुर्माने की सजा

जोधपुर की NDPS कोर्ट ने 12 साल पुराने अवैध मादक पदार्थ हेरोइन तस्करी के मामले में डांगियावास क्षेत्र के बावरला निवासी लालसिंह पुत्र रतनसिंह को दोषी मानते हुए 4 वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। स्पेशल जज मधुसूदन मिश्रा ने यह भी आदेश दिया है कि जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में लालसिंह को एक वर्ष अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।​ मामला जोधपुर के बनाड़ थाने में 25 मार्च 2013 को एफआईआर से संबंधित है। जिसमें तत्कालीन थानाधिकारी हनुमान सिंह झांझरिया की टीम ने बावरला फांटा क्षेत्र में स्थित सनसिटी पेट्रोल पंप/बांवरला फांटे के पास दबिश देकर लालसिंह पुत्र रतनसिंह को पकड़ा था। उसकी जेब में रखी प्लास्टिक थैली से 129 ग्राम हेरोइन (डायसेटाइलमॉर्फीन) बरामद की गई थी। बाद में इसकी पुष्टि FSL रिपोर्ट से भी हुई थी। चार्जशीट के बाद 10 गवाहों के बयान, 36 साक्ष्य भी रखे बरामदगी के बाद पुलिस ने लालसिंह को गिरफ़्तार कर NDPS Act के तहत केस दर्ज किया। जांच पूरी कर उसके खिलाफ कोर्ट में चार्ज शीट पेश की। ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 10 गवाहों के बयान कराए, 36 दस्तावेजी साक्ष्य और बरामद स्मैक व नमूनों सहित 4 आर्टिकल पेश किए। इस सभी से यह साबित हुआ कि 129 ग्राम हेरोइन बिना किसी लाइसेंस या परमिट के आरोपी के कब्जे से मिली थी। आरोपी ने अपने बयान में बरामदगी और आरोपों से इनकार करते हुए खुद को निर्दोष बताया, लेकिन अदालत ने उसके बचाव को स्वीकार नहीं किया।​ सरकारी वकील ने की सख्त सजा की मांग राजस्थान सरकार की ओर से नियुक्त विशिष्ट लोक अभियोजक (NDPS), जोधपुर, गोविन्द जोशी ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि अवैध मादक पदार्थों के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है और ऐसे अपराध गंभीर प्रकृति के हैं, जिनका समाज पर दूरगामी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। अभियोजक ने अदालत से कहा कि NDPS अपराधों के प्रति नरमी दिखाना न्याय व्यवस्था और समाज, दोनों के लिए घातक हो सकता है, इसलिए आरोपी को कठोरतम सजा दी जाए ताकि ऐसे तत्वों पर अंकुश लग सके। दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने लालसिंह की उम्र, पृष्ठभूमि और लंबे समय से चले आ रहे ट्रायल का हवाला देकर सजा में रियायत की मांग की।​ कोर्ट का विश्लेषण: सामाजिक प्रभाव और सजा की जरुरत विशिष्ट न्यायाधीश मधुसूदन मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों (जैसे बलदेवसिंह, विजयसिंह चंदूभा जडेजा आदि) का हवाला देते हुए कहा कि सजा तय करते समय अपराध की गंभीरता, उसका समाज पर प्रभाव और आरोपी की भूमिका पर संतुलित रूप से विचार करना अदालत का दायित्व है। आदेश में यह भी उल्लेखित किया गया कि अत्यधिक नरम सजा समाज की अंतरात्मा को झकझोर सकती है और इससे मादक पदार्थों के अपराधियों का हौसला बढ़ने का खतरा रहता है। अदालत ने माना कि आरोपी लालसिंह के पास से 129 ग्राम हेरोइन की बरामदगी, नमूना व FSL रिपोर्ट, गवाहों की गवाही और दस्तावेजी साक्ष्य से पूरी तरह प्रमाणित हो चुकी है, इसलिए उसे एनडीपीएस एक्ट के तहत दोषी करार देना उचित है।​ सजा के रूप में कोर्ट ने उसे 4 वर्ष का कठोर कारावास, 50 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया। साथ ही निर्देश दिया कि जुर्माना न भरने की स्थिति में उसे एक वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। आरोपी को पुलिस एवं न्यायिक अभिरक्षा में बिताई गई अवधि को मूल सजा में समायोजित करने का भी आदेश दिया गया।​

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