छत्तीसगढ़ में पिछले दिनों सेक्सुअल अब्यूज से जुड़े 2 बड़े मामले सामने आए। पहला मामला कांकेर जिले का है। जहां एक नाबालिग युवक ने आठ साल छोटे बच्चे के साथ रेप किया, फिर गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। वहीं दूसरा मामला रायपुर के एक हाई प्रोफाइल सोसाइटी का है। जहां 60 साल के एक बुजुर्ग महिलाओं की सैंडल हाथ में लेकर मास्टर बेट करता हुआ पाया गया। दोनों ही केस असामान्य यौन व्यवहार से जुड़े हैं। पहले वाले केस में क्रिमिनल एक्ट भी इन्वाल्व है। हालांकि ये दोनों केस केवल बानगी हैं। इस तरह के कई मामले पहले भी प्रदेश में आ चुके हैं। हमने दोनों केस को लेकर सीनियर साइकोलॉजिस्ट डॉ. एला गुप्ता से बातचीत की। इस तरह के एक्ट में इन्वाल्व लोगों की मनोदशा को समझने का प्रयास किया। विस्तार से पढ़िए इस रिपोर्ट में… केस – 1 कांकेर में एक नाबालिग लड़के ने 8 साल के लड़के को हवस का शिकार बनाया, फिर उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने बताया कि नाबालिग पोर्न वीडियो देखने का आदी था। वारदात के समय नशे की हालत में भी था। इस मामले को साइकोलॉजिस्ट की नजर से समझिए… नाबालिग युवक ने एडल्ट मूवी देखी और फिर अपनी सेक्सुअल नीड पूरी करने के लिए छोटे बच्चे का रेप कर उसकी हत्या कर दी। डॉ. एला गुप्ता कहती हैं कि जिस उम्र में आरोपी ने क्राइम किया है, उस उम्र में लड़का हो लड़की सेक्स के प्रति उसके भीतर उत्सुकता रहती है। पर्टिकुलर केस के दो साइड हैं। पहला, बच्चे को टीवी, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट और मोबाइल आसानी से उपलब्ध था। इन दिनों लगभग बच्चों के साथ ऐसा है। इस तरह बच्चे ने जो देखा, वो करना चाहा। ये उसकी मनोदशा थी। जब उसने सेक्सुअल एक्ट किया, तब उसे सिर्फ अपनी उत्सुकता को शांत करना था। उसने इसके रिजल्ट के बारे में नहीं सोचा। चाइल्ड माइंड जो देखता है वैसा डेवलप होता है डॉ. एला गुप्ता ने बताया कि लेकिन दूसरा एक्ट यानी छोटे बच्चे का मर्डर कर देना, ये एक क्रिमिनल माइंड है। यानी नाबालिग लड़का आपराधिक प्रवृत्ति वाला था। हम इसे साइकोलॉजी की भाषा में जुवेनाइल डेलिनक्वेंसी कहते हैं। किसी नाबालिग के भीतर इस तरह की आपराधिक प्रवृत्ति पनपने का कारण उसकी अप ब्रिंगिंग या एंबियंस से जुड़ी हो सकती है। ये कंडीशन आप के बच्चे के साथ भी हो सकती है डॉ. एला गुप्ता ने बताया कि जरूरी नहीं कि जुवेनाइल डेलिंक्वेंसी वाली कंडीशन सिर्फ उस एक पर्टिकुलर आरोपी के साथ हो, जिसके बारे में हम बात कर रहे हैं। ऐसा आप के बच्चे के साथ भी हो सकता है। मान लीजिए आप के घर में लड़ाई कॉमन है और बच्चा इसे रोज देख रहा है। ऐसे में उसके भीतर धीरे–धीरे आपराधिक प्रवृत्ति डेवलप होती चली जाएगी। उसके लिए ये नॉर्मल हो जाएगा, और जब वो कभी क्राइम कमिट करेगा तो उसे क्राइम करने का एहसास ही नहीं होगा। इसके अलावा मोबाइल में इन दिनों सब कुछ उपलब्ध है। डॉ. एला गुप्ता ने बताया कि यानी आपका बच्चा मोबाइल में पोर्न देख रहा है, या दूसरा कोई एडल्ट कंटेंट ये उसे स्क्रीन पर उपलब्ध है, फिजिकली आउट ऑफ रिच है। साइको लॉजिकली फिर वो उसे पाने की कोशिश करेगा। तो इस स्थिति में बच्चा खुद को गलत रास्ते में पुश कर लेगा। केस – 2 60 साल का बुजुर्ग व्यक्ति महिलाओं के सैंडल और चप्पलें हाथ में लेकर मास्टर बेट कर रहा था। घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। सोसाइटी वालों ने बताया बुजुर्ग पहले भी इस तरह के एक्ट कर चुका है। पुलिस ने केस भी दर्ज किया है, लेकिन डॉ. एला की माने तो ये एक मेंटल इलनेस है। बुजुर्ग को डॉक्टर को दिखाने की जरूरत है। महिलाओं की वस्तुओं या कपड़ों के साथ सेक्स बहुत कॉमन डॉ. एला बताती हैं कि ये बहुत कॉमन है। कुछ बड़ी उम्र के एडल्ट्स होते हैं, जो महिलाओं के कपड़े या उनके चीजों के साथ सेक्सुअल एक्टिविटी करते हैं। ये उनकी फैंटेसी का पार्ट है। एक बार से ज्यादा अगर इस तरह की चीजें हो ये ऑबसेसिव ऑबसेशन यानी ऑबसेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर है। एक ऐसी समस्या जिसमें व्यक्ति एक ही व्यवहार को बार–बार दोहराता है। इच्छा पूरी नहीं होने पर आते हैं ऐसे विचार या ये ट्रांसवेस्टिक फेटिशिज्म और फेटिशिस्टिक ट्रांसवेस्टिज्म भी हो सकता है। जिसमें कोई व्यक्ति महिलाओं के कपड़े पहनकर सेक्सुअली एक्टिव होता है। हालांकि इस तरह से अपनी फैंटेसी को रिलीज करने के कुछ कारण हो सकते हैं। मान लीजिए कोई पुरूष किसी महिला के साथ सेक्स करना चाहता है। लेकिन वो उसकी पहुंच से दूर है। तो इस स्थिति में वो उस महिला के चीजों के साथ अपनी फैंटेसी पूरी करता है। ये भी देखा गया है कि कुछ व्यक्ति अपने वैवाहिक जीवन या अपने पार्टनर से सेक्सुअल सैटिस्फाइड नहीं होती। अपनी कल्पनाओं के अनुसार या अपनी इच्छाओं के अनुसार वह सेक्स नहीं कर पाता। ऐसे में वो किसी भी महिला के कपड़े या सामान देखकर एकदम से उत्सुक हो जाते हैं।


