15वें दिन भी हाथी को ट्रैंकुलाइज नहीं कर पाया वन विभाग, बॉर्डर में घूम रहा

15 दिन में वन विभाग को सिर्फ 1 दिन दिखा भास्कर न्यूज | चाईबासा एक जनवरी से खूनी खेल खेल रहा दंतैल हाथी अब भी वन विभाग की ट्रैक से दूर है। न तो उसको सही ट्रैक कर पा रहे हैं वन विभाग के एक्सपर्ट और ना ही ओडिशा व झारखंड के वन विभाग की कोई काो-ऑर्डिनेशन दिख रहा है। 9 जनवरी को ओडिशा बॉर्डर पर बेनीसागर में हाथी लोकेट हुआ था। कुछ सेंकड के लिए 200 गुणा 200 मीटर के यूकेलिप्टस जंगल से दौड़ कर निकला था और पश्चिम बंगाल से आए एक हरकारे को मार दिया था। वहीं उसी दिन सुबह उसी जंगल में दो ग्रामीणों की जान ली थी। उसी रात ट्रैंकुलाइज की तमाम कोशिशों के बीच हाथी ओडिशा चला गया। पिछले चार दिनों से हाथी के ओडिशा में होने का अंदेशा है। ओडिशा वन विभाग भी बता रहा है कि हाथी ओडिशा की तरफ है। लेकिन उसे कोई सटीक ट्रैक नहीं कर पा रहे हैं। इधर झारखंड के बॉर्डर के मझगांव से जैंतगढ़ सीमा पर वन विभाग के एक्सपर्ट से लेकर 80 से ज्यादा वनकर्मी रोजाना शाम को जुट रहे हैं। संभावित जगहों पर मशाल जला रहे, थर्मल सेंसर ड्रोन चला रहे, लेकिन दंतैल हाथी मिल नहीं रहा है। वहीं मझगांव व केंदपोसी इलाके में दूसरे हाथी आकर घर तोड़ रहे हैं। बुधवार की रात मझगांव प्रखंड के तिलोकुटी एवं बुरुसाई दंतेल हाथी द्वारा दो मकान को तोड़ दिया गया। इसके बाद पहले से ही मौजूद वन विभाग की टीम द्वारा हाथी को मशाल व पटाखे की मदद से जंगल की ओर खदेड़ दिया गया। वहीं ग्रामीणों ने भी वन विभाग के साथ मिलकर हाथी को जंगल की ओर भगा दिया। इस बीच हाथी तिलोकुटी निवासी खेतरे हेम्ब्रोम और बुरुसाई निवासी राजू बोदरा के घर को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है। वहीं हाथी की घटनाओं को लेकर ग्रामीण रात भर जागकर पहरा दे रहे हैं। वहीं गुरुवार शाम करीब सात बजे 20 हाथियों का एक झुंड धंसारी में डेरा जमाए हुए थे। खड़पोस में चाईबासा रेंज के अधिकारी व वनकर्मी जमे हुए हैं। रोजाना शाम को मशाल पटाखा लेकर ग्रामीणों के साथ वनकर्मी वहां पहुंच रहे हैं, जहां हाथी पहुंचने की सूचना मिल रही है। एक्सपर्ट भी आसपास कैंप कर रहे हैं।

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