प्रादेशिक परिवहन कार्यालय में लगा आटोमैटिक ड्राइविंग ट्रैक करीब 15 दिनों से खराब है। इस वजह से लाइसेंस बनवाने के लिए पहुंच रहे आवेदक ट्रॉयल नहीं दे पा रहे हैं। रोजाना लोग जयपुर, आगरा, दिल्ली एवं अन्य शहरों से आ रहे हैं और मायूस लौट रहे हैं। ट्रैक नहीं चलने की सबसे बड़ी वजह सॉफ्टवेयर में खराबी और बंदरों के सीसीटीवी कैमरे की वायर तोड़ना बताया जा रहा है। अफसरों का कहना है कि दो-तीन दिन में ट्रैक चालू कर दिया जाएगा। ट्रैक बंद होने से करीब 400-450 स्थाई लाइसेंस ट्रॉयल अटके हुए हैं। परिवहन कार्यालय में लगे आटोमैटिक ड्राइविंग ट्रैक पर रोजाना 40-45 नए लाइसेंस के ट्रॉयल किए आते हैं। इसके अलावा लाइसेंस रिन्युवल कराने के लिए भी इसी ट्रैक पर रि-ट्रॉयल भी लिया जाता है। आवेदक को ट्रैक पर बाइक और कार चलानी होती है। इसमें पास होने के बाद लाइसेंस बनता है। करीब 15 दिनों से ड्राइविंग ट्रैक पर तकनीकी खराबी होने से ट्रॉयल नहीं हो रहे हैं। कई आवेदकों की लर्निंग लाइसेंस हुए एक्सपायर… लर्निंग लाइसेंस 6 महीने वैलिड होता है। ऐसे में आवेदक को एक से 6 माह के बीच स्थाई लाइसेंस के लिए ट्रॉयल देना अनिवार्य होता है। आरटीओ कार्यालय में कई आवेदक ऐसे भी पहुंचे जिनके लर्निंग लाइसेंस के वैधता तिथि मंगलवार थी। उन्हें दुबारा ट्रॉयल देने के लिए लर्निंग एक्सपायर की अवधि बढ़ाने के लिए 300 रुपए जमा कराने होंगे। करीब 60 आवेदक ऐसे हैं जिनके लर्निंग लाइसेंस एक्सपायर हो चुके हैं। सॉफ्टवेयर में टाइम शिड्यूल गड़बड़ाया… विभागीय अफसरों के अनुसार के ड्राइविंग ट्रैक के सॉफ्टवेयर में आए दिन तकनीकी खराबी आ रही है। नियमानुसार ट्रॉयल के लिए 8 मिनट का शिड्यूल होता है। जैसे ही आवेदक ट्रॉयल शुरू करता है यह टाइम शून्य हो जाता है और सॉफ्टवेयर आवेदक को फेल दिखाता है। इसके अलावा ट्रैक के आसपास बंदरों का जमावड़ा रहता है, जो आए दिन खंभों को हिलाते हैं, जिससे सीसीटीवी कैमरे के तार टूट जाते हैं और सेंसर काम करना बंद कर देता है। ^सॉफ्टवेयर में तकनीकी खराबी आने की वजह से ड्राइविंग ट्रैक बंद है। इसको सही करने के लिए इंजीनियर और प्रोग्रामर लगे हुए हैं। दो-तीन दिन में ड्राइविंग ट्रैक चालू कर दिया जाएगा। -ललित गुप्ता, जिला परिवहन अधिकारी, भरतपुर


