गुड़ाबांदा प्रखंड को बने 15 साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक इसे पूर्ण प्रखंड का दर्जा नहीं मिल पाया है। बहरागोड़ा और घाटशिला के बीच बंटा यह प्रखंड आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। हर विधानसभा चुनाव में यहां के विधायक पूर्ण प्रखंड का वादा करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही ये वादे ठंडे बस्ते में चले जाते हैं। इस अनदेखी का खामियाजा यहां की 40 हजार की आबादी को भुगतना पड़ रहा है। गुड़ाबांदा के लोग अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से नाराज हैं। उनका कहना है कि हर चुनाव में वादे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ नहीं होता। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में यहां के लोग खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। आज भी अधूरी हैं बुनियादी सुविधाएं : गुड़ाबांदा प्रखंड के स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करनेवाली विभाग प्रभार के आधार पर चल रही हैं। यहां के निवासियों को यह तक नहीं पता कि अपनी शिकायतें कहां दर्ज कराएं, और संबंधित पदाधिकारी कौन हैं। सरकारी अस्पताल की कमी के कारण मरीजों को या तो बहरागोड़ा या धालभूमगढ़ जाना पड़ता है। 12 उप-स्वास्थ्य केंद्र यहां बनकर तैयार हैं, लेकिन वे केवल दिखावे के लिए हैं। आवश्यक सुविधाओं और कर्मियों की अनुपस्थिति के कारण वे अपनी उपयोगिता खो चुके हैं। प्रशासनिक पदों पर भारी रिक्तियां प्रखंड स्तर पर: लिपिक (3 की आवश्यकता, पर केवल 1 कार्यरत) रात्रि प्रहरी, चालक, पंचायत सचिव (8 की आवश्यकता, 5 कार्यरत) सीडीपीओ, चिकित्सक प्रभारी, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, कृषि पदाधिकारी, पंचायत राज पदाधिकारी और पीएचईडी व बिजली विभाग के पद रिक्त हैं। अंचल स्तर पर अंचल निरीक्षक : राजस्व उप निरीक्षक (2 पद खाली), लिपिक (2 पद खाली), चालक (1 पद खाली) राजनीतिक वादे और जनता की उम्मीदें : गुड़ाबांदा विधानसभा क्षेत्र ने हालिया चुनाव में दो विधायकों को चुना, जिसमें बहरागोड़ा विधानसभा से समीर मोहंती, जिन्हें गुड़ाबांदा से 6,907 मत मिले। घाटशिला विधानसभा से रामदास सोरेन, जिन्हें गुड़ाबांदा से 7,615 मत मिले। इन दोनों विधायकों ने जनता को पूर्ण प्रखंड का दर्जा दिलाने का आश्वासन दिया था, लेकिन जनता अब तक इंतजार कर रही है। क्या कहती है जनता? सिंहपुरा के स्थानीय निवासी रामलाल महतो ने कहा, “हमने वोट देकर जनप्रतिनिधियों को जिताया, लेकिन बदले में हमें सिर्फ वादे ही मिले। अगर जल्द ही गुड़ाबांदा को पूर्ण प्रखंड का दर्जा नहीं मिलता, तो हम बड़े आंदोलन के लिए तैयार हैं।”


