राजसमंद के रिछेड़ गांव की यह बिल्डिंग उस दिन आग में घिरी हुई थी। इसमें मौजूद लोग चीख रहे थे। बाहर भी लोग आग-आग चिल्ला रहे थे। दमकल पहुंची नहीं थी। तत्कालीन चारभुजा थानाधिकारी शैतान सिंह आए और बिना वक्त गंवाए वर्दी में ही धधकते मकान में घुस गए। एक से दूसरे कमरे में लोगों को तलाशते रहे। पहले ऊपरी मंजिल से फिर ग्राउंड फ्लोर से पांच लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लाए। मकान में ही दुकान के एक कोने में धुएं के बीच दो लोग बेहोश पड़े थे। यही दो लोग थे वीरम सिंह और उनका बेटा हीरा सिंह। दोनों आज उसी मकान के बाहर शैतान सिंह का आभार जताने आए हैं। 12 जून 2010 का दिन हादसे के निशान आज भी ताजा है, क्योंकि जले हुए मकान का ज्यादातर हिस्सा दोबारा दुरुस्त नहीं करवाया गया है। मकान मालिक मुंबई में रहते हैं। 15 साल बाद उसी मकान के बाहर रोंगटे खड़े कर देने वाली उस घटना की यादों और उसकी तस्वीरों के साथ वीरम सिंह हाथ जोड़कर शैतान सिंह से कह रहे हैं- शुक्रिया! आप ना होते तो मेरा भरा-पूरा परिवार न जाने किस हाल में होता। शॉर्ट सर्किट से लगी आग में घर घिर गया था। लपटें इतनी भयानक थी कि आज भी दीवारों पर कालिख पुती है। ऊपर गैस सिलेंडर भी थे, धमाका हो सकता था। लेकिन आप हम सबके लिए भगवान बनकर आए शैतान सिंह नाथावत। आपने अपने बारे में कुछ भी सोचे बिना हम सबको बचा लिया। शैतान सिंह ने बताया- मुझे बस चीखें सुनाई दे रही थीं। मैं खुद को रोक नहीं पाया। मकान में घुस गया। पुलिस ट्रेनिंग काम आई। फिर फायर ब्रिगेड का सपोर्ट भी मिल गया था। सबसे पहले ऊपर से लोगों को बाहर निकाला। वहां गैस सिलेंडर लीकेज हो रहे हैं। उन्हें ऊपर से ही सड़क पर फेंका। मैं भी झुलस गया था, लेकिन जिम्मेदारी और इंसानियत सबसे पहले है। वीरम और इनका बेटा भी वहीं बेहोश पड़े थे। सबको सुरक्षित देखकर अच्छा लगा। अब रिछेड़ के पास धोला की ओड में रह रहे वीरम और उनके बेटे हीरा बोले- लगता है कल की ही बात है। आप ना होते तो हम कल बन चुके होते। शैतान सिंह वर्तमान में राजसमंद में जिला संचित निरीक्षक हैं। वीरम की कृतज्ञता पर बोले- जहां जरूरी हो, वहां मददगार जरूर बनना। 1 अक्टूबर 2025; घटना के 15 साल बाद वीरम और उनका बेटा हीरा सिंह राजसमंद के रिछेड़ गांव में उसी मकान के बाहर शैतान सिंह (पुलिस वर्दी में) से मिले और जीवन बचाने का आभार जताया। शैतान सिंह बोले- मैंने अहसान नहीं किया, शुक्रिया करना है तो किसी की मदद कर देना।


