150 साल पुरानी परंपरा के अनुसार मां काली की पूजा:पाकुड़ में हरे पेड़ के नीचे विराजित ग्राम रक्षा काली का विशेष अनुष्ठान, भक्तों का उमड़ा सैलाब

पाकुड़ शहर के हरतक्की तल्ला में स्थित पुराने हरे पेड़ के नीचे विराजमान मां ग्राम रक्षा काली की पूजा चैत्र मास की परंपरा के अनुसार संपन्न हुई। मंगलवार को अपराह्न में पुरोहित लाल कुमार राय ने पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। बड़ी संख्या में बकरों की बलि भी दी गई पूजा में सर्वप्रथम मां को कच्चे दूध से स्नान कराया गया। पुजारी ने खौलते दूध को अपने शरीर पर लगाकर भक्तों को आशीर्वाद दिया। इस दौरान भक्तों ने मां के जयकारे लगाए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बकरों की बलि भी दी गई। समिति सदस्य दीपू उपाध्याय ने बताया कि यह परंपरा 150 वर्षों से अधिक पुरानी है। वर्तमान पुजारी के पूर्वज भी यहां पूजा करते रहे हैं। स्थल पर मौजूद पेड़ सैकड़ों वर्ष पुराना है। यह पेड़ आज भी हरा-भरा है और फल-फूल देता है। यहां मांगी गई मन्नतें पूरी होती हैं स्थानीय मान्यता के अनुसार, इसी पेड़ के नीचे मां ग्राम रक्षा काली विराजमान हैं। भक्तों का विश्वास है कि यहां मांगी गई मन्नतें पूरी होती हैं। मन्नत पूरी होने पर भक्त फल-प्रसाद के साथ बकरे की बलि भी चढ़ाते हैं। इसी हरे पेड़ के कारण मोहल्ले का नाम हरतक्की तल्ला पड़ा। पूजा के अवसर पर मेले का भी आयोजन किया गया। समिति के सदस्यों ने पूजा के सफल आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई।

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