18 हेक्टे. जमीन पर कब्जा था, अब यहां सागौन के 32500 पौधे

भास्कर न्यूज | कवर्धा/बोड़ला जहां कभी अतिक्रमण था, वहां अब सागौन की कतारें भविष्य की हरियाली का भरोसा जगा रही हैं। वन विकास निगम के कवर्धा परियोजना मंडल अंतर्गत बोड़ला परिक्षेत्र ने आरक्षित वन भूमि को बचाने पहल की है। आरक्षित वन कक्ष क्रमांक आरएफ-02 की 18 हेक्टेयर भूमि पर लंबे समय से अवैध कब्जा था, अब 32500 सागौन पौधों के साथ फिर से जंगल का स्वरूप लेने लगी है। वन विभाग के लिए यह आसान नहीं था। वर्षों से कब्जे में रही यह भूमि न सिर्फ शासकीय संपत्ति के दुरुपयोग का प्रतीक बन चुकी थी, बल्कि आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ रहा था। अतिक्रमण का दबाव लगातार बढ़ रहा था। ऐसे में वन निगम अमले ने पहले अतिक्रमण हटाया। फिर उस पर हरियाली लाने की सोंची। पथरीली भूमि में क्रो-बार तकनीक से लगाए पौधे अतिक्रमण हटने के बाद सामने आई पथरीली और कठोर जमीन अपने आप में बड़ी चुनौती थी। इसके बावजूद मृदा संरक्षण पर विशेष काम करते हुए 13 हेक्टेयर नेट क्षेत्र को रोपण योग्य बनाया। वन विकास निगम की नर्सरी में तैयार सागौन रूट-शूट पौधों का क्रो-बार तकनीक से यहां लगाए गए। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बढ़ाया कदम यह पूरा क्षेत्र अब सागौन वन में तब्दील हो चुका है। यह प्रयास न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मजबूत कदम है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में वन और वन भूमि को लेकर नई जागरूकता भी पैदा कर रहा है। इस सफलता से प्रेरणा लेकर अन्य अतिक्रमित वन क्षेत्रों को भी हरियाली लौटाने कोशिश की जा रही है।

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