भास्कर न्यूज | जालंधर क्रिसमस की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंची हैं। आदर्श नगर में 18 वीं सदी की गोलक नाथ मेमोरियल चर्च में 1 जनवरी तक के धार्मिक समारोह का शेडयूल तय हो गया है। क्रिसमस के दिन यहां खास आयोजन किया जाएगा। ब्रिटिश काल का ये गिरजाघर गजब का खूबसूरत है। सोमवार की दोपहर 1 बजे जैसे ही गिरजाघर के नक्शीदार दरवाजे के अंदर गए तो सुंदर सफेद फूलों से सजावट की जा रही थी। चर्च के अंदर जहां गायक मंडली एवं पादरी के लिए स्थान है, वहां पर भी सुंदर सजावट हो रही है। यहां एक और बात दिखी। यहां धनुषाकार प्रवेश द्वार पर प्राचीन काल से ही उर्दु में चर्च का नाम लिखा है। जब ये चर्च बना तो जालंधर की बड़ी आबादी मुसलिम थी। चर्च में बड़ी संख्या में उर्दू बोलने वाले लोग शामिल होते थे, समय के साथ उर्दू पढ़ने या समझने वालों की संख्या कम हो गई है।लेकिन भाईचारे का ये प्रतीक कायम है। उधर गिरजाघर के परिसर को सुंदर रौशनी से सजाया जा रहा है। यहां पर 6 दिसंबर को कैरल सिंगग आरंभ हो गई, जो 19 दिसंबर को संपन्न होगी। इसके बाद 23 की शाम धार्मिक नाटक का मंचन होना है। सोमवार को इसकी रिहर्सल चल रही थी। यहां पर युवा विलसन ने बताया कि क्रिसमस पर विभिन्न स्थानों से संगत आएगी। इसकी रिहर्सल भी जारी है। ईसाई समाज के लोगों में खुशी है। 1830 के दशक में, जब ब्यास नदी के इस तरफ (जालंधर दोआब) में ब्रिटिश काल में ईसाई धर्म को विस्तार मिलने लगा। यहां एकमात्र ईसाई मिशन ब्रिटिशों के थे। रेव गोलकनाथ चटर्जी के नाम पर ये प्राचीन चर्च है। वह एक युवा बंगाली ब्राह्मण थे। उन्होंने कलकत्ता में अपना घर त्याग दिया था। ईसा मसीह की शिक्षाओं से प्रेरित होकर तपस्या अपना ली थी। पहले वह लुधियाना में धर्मार्थ सेवा में कार्यरत रहे। फिर जालंधर आए। उन्होंने जालंधर में शिक्षा के प्रसार में अहम कार्य किया। उनकी याद दिलाया चर्च 12 एकड़ में है। यहां प्राचीन सुंदर पेड़ व इमारती शैली जालंधर को खास पहचान दे रही है।


