घोनेवाल में गिरी एक मकान की दीवार। अर्जन सिंह का यहां मकान था। टूटी दीवारों की ईंटे संभालता रविंदर। ढेर हुआ परमजीत कौर का मकान। विक्की कुमार | अमृतसर रमदास में आई बाढ़ के बाद सबसे अधिक नुकसान गांव घोनेवाल में हुआ है। गांव के कई घर पानी में बह गए और कइयों की दीवारें तक बह गई। इतना ही नहीं कई घर जमीन में धंसे पड़े हैं। हालात यह है कि लोग घरों के बाहर सड़कों पर रहने को मजबूर हैं। इसके अलावा सड़कें और गलियां तक गायब हो गई हैं। 27 अगस्त की तड़के जैसे ही पानी का फ्लो बढ़ा तो धुस्सी बांध टूटा और घोनेवाल के घरों की दीवारों को चीरते हुए उन्हें जमीदोंज कर दिया। तभी से ही उक्त गांव के लोग बिजली के बिना ही रह रहे हैं। यहां के हालातों का मुआयना करने के लिए जब दैनिक भास्कर की टीम शुक्रवार को उक्त गांव में पहुंची तो यहां हालात बदत्तर दिखे। गांव में 50 साल से रह रहे फैज का घर भी पानी में बह गया। 6 महीने पहले ही उसने अपना घर बनाया था। फैज का कहना कि बाढ़ में घर का सारा सामान बह गया। वहीं दविंदर सिंह का कहना था कि जब बाढ़ आई तो उसका पानी जैसे ही गांव में आया तो उससे घर डूब गए। जब पानी निकला तो देखा कि घर के फर्श जमीन में धंस गए। घर की दीवारों में भी दरारें आ गईं। कभी भी नुकसान हो सकता है। उसका कहना था कि दरिया के पास ही उनकी सवा किले जमीन थी, जहां फसल लगाई हुई थी, लेकिन वह सारी की सारी बह गई। लाखों का उनका नुकसान हो गया है। इसी तरह परमजीत सिंह का कहना था कि बाढ़ से उनके घर की दीवारों में भी दरारें आई है। सीढ़ियों के नीचे पाड़ आ गया है जो कभी भी गिर सकती हैं। धुस्सी बांध जब टूटा तो सबसे पहले पाठी गुरप्रीत सिंह का घर बह गया। गुरप्रीत के करीब 3 कमरे थे, जिसमें से 2 कमरो में वह रह रहा था और एक पशुओं के लिए बनाया था। जिसमें वह रह रहा था, वह दोनों ही बह गए। छतें टूट गई। दीवारें जमीन में धंस गई। घर में पड़ी अलमारी-बैड सब पानी में बह गया। गुरप्रीत सिंह का कहना था कि वह गुरुद्वारा बाबा बुड्डा साहिब रमदास में पाठ करता है और उसी से ही अपनी मां व पिता का पालन पोषण करता है। पिता हालांकि बाबा बड़भाग सिंह में सेवा निभा रहे हैं, लेकिन उनकी भी तबीयत ठीक नहीं रहती। उनकी दवाई आदि भी वह ही करता है। ऐसे में उसका अब दोबारा घर बनाना काफी मुश्किल होगा। बाढ़ का पानी उतरने के बावजूद घोनेवाल की सड़कें 10 दिन से जलभराव में हैं, जिससे गांव तक पहुंचना मुश्किल बना हुआ है। घोनेवाल से कमालपुर जंगलों तक छोटे-बड़े पाड़ों की मरम्मत और भराई का काम आर्मी और समाजसेवी संस्थाओं ने शुरू कर दिया है। अनुमान है कि अगले 7–8 दिन में सभी पाड़ भर दिए जाएंगे। इसके बाद रावी में पानी बढ़ने पर भी गांवों में दोबारा पानी नहीं आएगा। तब तक घोनेवाल समेत अमृतसर के 190 गांव पूरी तरह निश्चिंत नहीं हो पाएंगे। अमृतसर के बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहले छोर घनिए की बेट से लेकर दूसरे छोर गांव नेपाल और कड़ियाल तक पानी कम हो चुका है। गांवों से पानी उतर गया है, लेकिन खेतों में अब भी भराव है। रमदास से लोपोके तक लगभग 100 किलोमीटर के दायरे में फसलें बर्बाद हो गईं और कई सड़कें टूट चुकी हैं। हालात पहले से सुधरे जरूर हैं, मगर खतरा अभी टला नहीं है। बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है। गांव घोनेवाल के अर्जन के 2 कमरे बाढ़ में बह गए। दो कमरे थे, जिसमें वह रह रहे थे। बाढ़ के कारण छत्त तो खत्म हो गई और इन दिनों वह बिना छत्त के ही अपने परिवार के साथ रहने को मजबूर है। उनका कहना था कि बाढ़ ने सब कुछ खत्म कर दिया। घर में सामान था, जो पानी में बह गया। अलमारी और बैड भी बह गए। वह मजदूरी करते हैं। घर बनाने में अब पता नहीं कितना समय लगेगा। नुकसान से पार पाना मुश्किल है। घोनेवाल में 12 साल का रविंदर अपने घर की टूटी दीवारों की ईंटे इकट्ठी कर रहा था। जब उससे बात की तो बोला ‘साड्डे सारे दाने पानी विच्च रूड़ गए, जदो दा पानी आया है, ओदो तो ही बिना बिजली दे रह रहे हां, कुदरत ने जो कहर बरपाया है, उस दे नाल लड़ रहे हां, बाद में बोला आओ.. चाय पानी ल्यावां।’ रविंदर चाहे उक्त हालातों से लड़ रहा था, लेकिन उसके चेहरे को देखकर ऐसा लग रहा था कि अभी उम्मीद टूटी नहीं है। हालात बदलेंगे और फिर वहीं जिंदगी शुरु होगी। रविंदर के पिता का नाम रविदास है और वह दिहाड़ी मजदूरी करता है। बाढ़ के कारण उसके घर की दीवारें गिर गई। घर में जो भी कुछ था पानी में बह गया। गांव घोनेवाल के कश्मीर सिंह ने कहा कि इस बार जो हालात हुए है, ऐसे 1988 में भी नहीं हुए थे। पिछले 9 दिन से अपने पशुओं के साथ घर से बेघर होकर रह रहे हैं। घोनेवाल में जहां धुस्सी का बांध टूटा है, कश्मीर सिंह वहीं अपना डेरा जमाए हुए हैं। कश्मीर का कहना था कि अब नुकसान से उभरने में काफी समय लग जाएगा। उन्होंने कहा कि वह भी हारे नहीं है और जिंदगी की जंग जारी है।


