2 महीने के बेटे दैविक को लंगूरी बाणा डालकर झब्बाल रोड निवासी कमल परिवार के साथ मंदिर पहुंचे। उन्होंने कहा कि पहला बेटा होने पर मन्न पूरी करने लंगूर बनाकर माथा टेकने आए हैं। 5 महीने के बेटे गौरीश को पिता गोपाल ने गोद में उठाया हुआ था। गौरीश ढोल को बजते देखकर कभी इधर तो कभी उधर देखकर खुश होता रहा। गोपाल ने कहा कि उनके घर में पहला बेटा हुआ है और वह लंगूर बनाकर माथा टेकने आए है। लाहोरी गेट निवासी ज्योति अपनी 3 महीने की नातिन बच्ची लाज को लंगूर बना पहुंची। माथा टेकने के लिए मंदिर में लाइनें लगी थीं पर बेटी सो रही थी। महिला ज्योति का कहना है कि लंगूर बनाने के लिए बेटी को सुबह 5 बजे उठाया था तो अब सो जाने को जिंद कर रही थी। श्री दुर्ग्याणा तीर्थ में लंगूर मेले के दौरान निकाली झांकी में माथा टेकते श्रद्धालु (मध्य) बड़ा श्री हनुमान मंदिर में बच्चों को दर्शन कराने पहुंचे श्रद्धालु (दाएं) लंगूरी बाणे पहने बच्चे नाचते हुए। सतीश कपूर | अमृतसर शारदीय नवरात्र के साथ उत्तर भारत के प्रसिद्ध श्री दुर्ग्याणा तीर्थ के बड़ा श्री हनुमान मंदिर में सोमवार को लंगूर मेला शुरू हो गया। इस मेले में देश भर में आई बाढ़ का असर देखने को मिला। पिछले साल की तुलना में इस बार लंगूर मेले में करीब 5 हजार से कम बच्चे लंगूर बने। जिसके कारण इस लंगूर मेले में भीड़ की रौनक कम नजर आई। पिछले साल की तुलना में इस बार लंगूर कम तो बजरंगी सेना बढ़ी है। साल 2024 में करीब 8000 बच्चों में लंगूरी बना धारण किया था। परंतु इस बार तो 5 हजार से भी कम बच्चे लंगूर बने हैं। वहीं पिछले साल बजरंगी सेना की 102 टोलिया बनी थीं और इस बार 135 के ऊपर हो गईं। इस बार बड़े बच्चों में लंगूर बनने का क्रेज कम हुआ है और बजरंगी सेना बनने का क्रेज बढ़ा है। पहले दिन लंगूर मेले में विदेश से कोई बच्चा लंगूर बनकर माथा टेकने नहीं पहुंचा। जबकि अमृतसर समेत होशियारपुर, फिरोजपुर, पटियाला, जालंर, पठानकोट, चंडीगढ़, तरनतारन और जम्मू कश्मीर और दिल्ली के बच्चे ही लंगूर बनने पहुंचे। बीवी धनवंत कौर सराय में लंगूर बने बच्चों के परिवार तो ठहरे हैं पर गोल बाग दुर्ग्याणा सराय में अभी तक एक भी परिवार ने बुकिंग नहीं करवाई। लंगूर मेले में सबसे छोटा 2 महीने का बच्चा दैविक को परिवार वाले लंगूर बनाकर माथा टेकने लाए हैं। पिछले साल की तुलना में इस बार लंगूर मेले में कम बच्चे लंगूर बने। जिसके कारण इस बार लंगूर मेले में भक्तों की भीड़ की कमी के कारण रौनक बहुत कम नजर आई दिल्ली से 18 साल की बेटी कशिश लंगूर बनकर मेले में आई। लंगूर बनी कशिश का कहना है कि उनके दादा परिवार शहर में ही रहते हैं। कशिश ने कहा कि उसे हनुमान जी बहुत पसंद है इसलिए पहली बार मेले में लंगूर बनकर माथा टेकने आई। लंगूरी बाणा पहने कशिश हाथों में हनुमान ध्वज पकड़ेअलग ही नजर आई। दादी साधना पांधी का कहना है कि उन्हें खुशी है कि बेटी सनातन धर्म के संस्कारों से जुड़ी है। दुर्ग्याणा के बड़ा श्री हनुमान मंदिर में लंगूर मेले में लंगूर बने बच्चों ने माथा टेका। वहीं छेहर्टा निवासी जतिंदर सोढ़ी अपने डेढ़ साल के बच्चे को लंगूरी बाणा पहनाकर मेले में पहुंचे। सुबह के समय पहुंचे सोढ़ी का कहना है कि उन्होंने मन्नत मांगी थी इसलिए बच्चे को लंगूर बनाया है। हाथी गेट निवासी जसविंदर सिंह गौरा भी 4 साल के बच्चे को लंगूर बनाकर मंदिर में माथा टेकने पहुंचा। गौरा ने कहा कि 5 साल पहले परिवार के सदस्य मंदिर में माथा टेकने आए तो उन्हें अपने बच्चे को लंगूर बनाने की बात कही थी। इसलिए इस बार बच्चे को लंगूर बनाकर लेकर आए हैं।


