2 साल में बनी 3 टन वजनी वीरमदेव की मूर्ति:सेना करेगी एयरलिफ्ट, उद्घाटन के लिए गृहमंत्री और सीएम को न्योता भेजा

जालोर में टुंकाली पहाड़ी क्षेत्र में तीन दिनों से चल रहे हवन कार्यक्रम की विधिवत पूर्णाहुति शनिवार को संपन्न हुई। इस अवसर पर भामाशाह परिवार की ओर से पहाड़ी के नीचे 18 इंच ऊंची प्रतीकात्मक प्रतिमा की स्थापना की गई। यह मुख्य प्रतिमा स्थापना की औपचारिक शुरुआत है और जल्द ही पहाड़ी की चोटी पर प्रतिमा स्थापित की जाएगी। मुगल शासक अलाउद्दीन खिलजी की सेना को पराजित करने वाले वीर शासक वीरमदेव की मुख्य प्रतिमा 18 फीट ऊंची और करीब 3 टन वजनी है। प्रतिमा को पहाड़ी तक पहुंचाने के लिए सेना के हेलिकॉप्टर से एयर-लिफ्ट किया जाएगा। फिलहाल प्रतिमा स्थापना की तिथि निर्धारित नहीं की गई है। उद्घाटन कार्यक्रम के लिए गृहमंत्री एवं मुख्यमंत्री को आमंत्रण भेजा गया है।
वजन और स्थान की वजह से हेलिकॉप्टर से होगी स्थापना वीरमदेव फाउंडेशन के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह मोछाल ने बताया- प्रतिमा का वजन काफी अधिक है और टुंकाली पहाड़ी की चोटी पर स्थान सीमित है। ऐसे में सामान्य तरीकों से प्रतिमा को ऊपर ले जाना संभव नहीं है। इसी कारण सेना के हेलिकॉप्टर की मदद ली जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रतिमा स्थापना से जुड़ी सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सेना द्वारा तारीख तय होते ही प्रतिमा को पहाड़ी पर स्थापित कर दिया जाएगा। स्थापना के दिन पैनोरमा और बुकलेट होगी जारी प्रतिमा की स्थापना के दिन वीरमदेव के शौर्य और इतिहास पर आधारित पैनोरमा और बुकलेट भी तैयार की जाएगी, जिसे आम जनता के लिए निशुल्क वितरित किया जाएगा। वीर वीरमदेव का शौर्यपूर्ण इतिहास वीरमदेव, जालोर के शासक कान्हड़देव के पुत्र थे। उन्होंने अलाउद्दीन खिलजी की सेना को पराजित कर खदेड़ा था। यह युद्ध जालोर के गौरवशाली इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है। इतिहास के अनुसार, खिलजी की बेटी फरोजा वीरमदेव की वीरता से प्रभावित थी और उसने विवाह का प्रस्ताव भिजवाया था, लेकिन वीरमदेव ने प्रस्ताव ठुकरा दिया था। उनकी यह प्रतिमा जालोर के शौर्य और स्वाभिमान का प्रतीक मानी जा रही है। दो साल में बनी प्रतिमा, 10 किमी दूर से आएगी नजर वीरमदेव की प्रतिमा के निर्माण में करीब दो साल का समय लगा है। टुंकाली पहाड़ी पर स्थापित होने के बाद यह प्रतिमा 10 किलोमीटर दूर से भी दिखाई देगी। प्रतिमा अष्टधातु से निर्मित है मूर्ति को तीन हिस्सों में तैयार किया गया है सबसे भारी हिस्सा अश्व है, जिसका वजन करीब 2 टन है तीनों हिस्सों को ब्रास पेस्ट से जोड़ा गया है वर्तमान में प्रतिमा जालोर के ग्रेनाइट क्षेत्र स्थित एक फैक्ट्री में रखी गई है प्रतिमा की कुल ऊंचाई 18 फीट, फाउंडेशन की ऊंचाई 10 फीट और चौड़ाई 6 फीट है। वीरमदेव की कद-काठी और पहनावा कान्हड़देव प्रबंध में दिए गए वर्णनों के आधार पर तैयार किया गया है। हरिद्वार के प्रसिद्ध मूर्तिकार ने किया निर्माण इस प्रतिमा का निर्माण हरिद्वार के प्रसिद्ध मूर्तिकार फकीर चरण परिड़ा ने किया है। वे इससे पहले भी पुराने संसद भवन में स्थापित कई प्रसिद्ध प्रतिमाओं का निर्माण कर चुके हैं। — यह खबर भी पढ़े… राजस्थान में लगेगी 3 हजार किलो की वीरमदेव की मूर्ति:खिलजी की बेटी को हुआ था इस वीर से प्यार; सेना करेगी एयरलिफ्ट मुगल शासक अलाउद्दीन खिलजी की सेना को खदेड़ने वाले वीर शासक वीरमदेव की प्रतिमा हेलिकॉप्टर से एयरलिफ्ट कर टुंकाली पहाड़ी पर स्थापित की जाएगी। ये प्रतिमा 18 फीट ऊंची व 3 टन वजनी है। पूरी खबर पढ़िए

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