‘बी.एड करने के बाद चपरासी का एग्जाम देने आया हूं….लोग मजाक उड़ाएंगे तो सुन लेंगे लेकिन अब बेरोजगारी का ताना नहीं सुना जाता।’ ‘हम प्राइवेट सेक्टर में 5-10 हजार की नौकरियों के लिए कब तक धक्के खाएं। हमें भी सरकारी नौकरी चाहिए’ चतुर्थ श्रेणी भर्ती परीक्षा के 53000 पदों के लिए बड़ी संख्या में ओवर क्वालिफाइड अभ्यर्थी 19 सितंबर को भाग्य आजमाने पहुंचे। भास्कर ने परीक्षा केंद्रों से निकलकर अपने घर लौट रहे कुछ अभ्यर्थियों से बात की। कोई केमिस्ट्री से एमएससी-बीएड, तो कोई इंजीनियरिंग का डिप्लोमा के बाद बेरोजगार बैठा था। पढ़िए- ये रिपोर्ट… इंजीनियरिंग के बाद जॉब नहीं मिली तो चपरासी की तैयारी
झोटवाड़ा में एक सेंटर पर नवलगढ़ से परीक्षा देने आए महिपाल ने बताया- आईटीआई के बाद पॉलिटेक्निक डिप्लोमा इस उम्मीद से किया था कि बड़ी इंडस्ट्री में जॉब मिल जाएगी। पढ़ाई के बाद से बेरोजगार बैठा था। परिवार के पास इतनी खेती नहीं है कि पेट पाल सकें। अब फोर्थ ग्रेड भर्ती में किस्मत आजमाने आया हूं। अब सारी उम्मीदें इसी पर टिकी हैं। सरकारी नौकरी में कुछ छोटा बड़ा नहीं होता। घर में बूढ़े मां-बाप हैं। थोड़ी-बहुत खेती है। उससे इतनी आमदनी नहीं कि जीवन गुजार सकें। परिवार पालना है, इसलिए परीक्षा दे रहा हूं। चार साल से बेरोजगार, मजदूरी कर माता-पिता घर चला रहे
सीकर के नीम का थाना से आए रवि वर्मा के माता पिता मजदूरी करते हैं। चार-पांच साल से बेरोजगार हैं। वो कहते हैं- परिवार का मजदूरी से गुजारा नहीं चलता। माता-पिता कहते हैं तू सरकारी नौकरी में लग जाएगा तो दिन संवर जाएंगे। शिक्षा विभाग भर्ती ही नहीं निकालता। रवि ने बताया- मैं एमए, बीएड हूं। घर का सबसे बड़ा बेटा हूं। कई साल से बेरोजगार हूं। फॉर्म भरने से ज्यादा एग्जाम देने आने में 400-500 रुपए खर्च हो जाते हैं ये मेरे मां-बाप की एक दिन की दिहाड़ी है। यही सोचकर एग्जाम दिया है कि अभी तो चपरासी की सरकारी नौकरी भी मिल जाए तो ठीक है। कम से कम परिवार का सहारा तो बन सकेंगे। चपरासी का मंजूर, बेरोजगारी का ताना सहन नहीं
गांधीनगर में एक एग्जाम सेंटर के बाहर सीकर के आदित्य मिले। उनकी भी यही पीड़ा थी। बीएड कर चुके आदित्य ने बताया- शिक्षा विभाग में भर्ती नहीं होने से बेरोजगार बैठे हैं। चतुर्थ श्रेणी भर्ती परीक्षा भी इसलिए दी है कि नौकरी तो लगे। लोग मजाक उड़ाएंगे तो सुन लेंगे, लेकिन अब बेरोजगार का ताना नहीं सुनना चाहते। केमिस्ट्री में एमएससी, अब चपरासी के लिए भाग-दौड़
झुंझुनूं के गांव कालोटा पवाई से आए नीलेश जांगिड़ सिस्टम से कितने हताश हैं, यह उनकी आवाज से साफ झलक रहा था। हमने बात करनी चाही तो पहले मना कर दिया। फिर बोले- बेरोजगारी के कारण गांव से इतनी दूर चपरासी भर्ती की परीक्षा देने आए हैं। नीलेश ने बताया- मैंने केमिस्ट्री से एमएससी की हुई है। दो साल पहले नौकरी की उम्मीद में बीएड भी की। अभी तक नौकरी नहीं मिली। माता-पिता किसान हैं, उन्हें सपोर्ट करने के लिए प्राइवेट ट्यूशन पढ़ाता हूं। खेती की जमीन से पेट तो भर जाता है, लेकिन सपने पूरे करने के लिए सरकारी नौकरी ही चाहिए। ऑटो ड्राइवर पिता का सपना, बेटा सरकारी नौकरी करे
सीकर के मनीष ग्रेजुएट हैं। अब फोर्थ ग्रेड परीक्षा के लिए जयपुर आए हैं। पिता ऑटो रिक्शा ड्राइवर हैं। एग्जाम होने के बाद घर जाने के लिए कभी इस बस में तो कभी उस बस में दौड़ते नजर आए। हमने पूछा तो बोले- चतुर्थ श्रेणी में बुराई क्या है? सरकारी नौकरी मिल जाएगी, यह कम है क्या। कम से कम पिता जी को सपोर्ट कर सकूंगा। पिता बहुत मेहनत से परिवार चलाते हैं। उनकी जिम्मेदारी बांट सकूं, बस इतनी सी कोशिश की है। श्रीमाधोपुर से परीक्षा देने आई सुनीता शर्मा एमए बीएड हैं। उनका कहना है कि हम प्राइवेट सेक्टर में 5-10 हजार की नौकरियों के लिए कब तक धक्के खाएं। हमें भी सरकारी नौकरी चाहिए। एमए, बीएड होने के बावजूद यह परीक्षा दी है। सरकार भर्ती निकालने में बैलेंस तो बनाए। एमबीए, बीटेक किए हुए अभ्यर्थी भी चपरासी की परीक्षा देने को मजबूर हैं, क्योंकि अलग-अलग सेक्टर में भर्ती का अनुपात समान नहीं है। कोई सेक्टर नियमित रूप से भर्ती नहीं निकाल रहा है तो कहीं इतना लंबा इंतजार है कि खत्म ही नहीं हो रहा। सरकारी नौकरी के इंतजार में हम ओवर क्वालिफाइड हो चले हैं। उम्र भी निकली जा रही है। एमएससी पास पत्नी को दिलवाई चपरासी की परीक्षा
एमएससी पास अपनी पत्नी चित्रा कंवर को परीक्षा दिलाने पहुंचे चंद्र सिंह गौड़ ने बताया कि उनकी पत्नी ने इससे पहले स्टेनोग्राफर, पटवारी और आरएएस जैसी परीक्षाएं भी दी हैं, लेकिन आज वे चपरासी भर्ती परीक्षा देने आई हैं। चौमूं की अर्चना कुमावत ने M.SC बीएड कर रखा है। अर्चना को एग्जाम दिलाने उनके साथ आए पति अजय कुमावत ने बताया कि पत्नी ने पहले काफी एग्जाम दिए, फर्स्ट ग्रेड, सेकेंड ग्रेड का भी दिया। लेकिन किसी में भी नंबर नहीं आया। यह दर्शाता है कि उच्च शिक्षित युवा भी सरकारी नौकरी पाने के लिए हर अवसर का लाभ उठा रहे हैं। टिकट खिड़कियों पर भीड़, कतारों में बीता दिन
टिकट विंडो पर एग्जाम लेटर हाथों में थामे टिकट लेने के लिए कतार में खड़े नजर आए युवा कुछ घंटों पहले अपने अपने सेंटर के मुख्य द्वार पर भी कतारों में खड़े थे। बसें इस कदर भरी हुई थी कि चलने से कई घंटे पहले ही बसों के दरवाजे बंद करने पड़े। हर किसी के चेहरे पर फिक्र और गर्मी का सितम साफ नजर आ रहा था। — चपरासी भर्ती की ये खबरें भी पढ़िए… चपरासी भर्ती परीक्षा के बाद बसों में उमड़ी भीड़:RAS-प्री क्लियर कर चुके अभ्यर्थी भी एग्जाम देने पहुंचे थे,एंट्री के लिए कैंडिडेट ने जोड़े हाथ राजस्थान ग्रेड फोर्थ (चपरासी) भर्ती परीक्षा आज से शुरू हो गई है। 21 सितंबर तक रोज दो पारी में परीक्षा होगी। शुक्रवार को पहली पारी की परीक्षा सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक हुई। दूसरी पारी की परीक्षा दोपहर 3 बजे से शुरू हुई, जो शाम 5 बजे तक चली। पढ़ें पूरी खबर… चपरासी भर्ती परीक्षा देने आए युवक की हार्ट-अटैक से मौत:श्रीगंगानगर में पेपर देकर पैदल जा रहा था, सेंटर से 3KM दूर चक्कर खाकर गिरा श्रीगंगानगर में चपरासी भर्ती परीक्षा देने आए एक 23 वर्षीय युवक की हार्ट अटैक से मौत हो गई। वह शुक्रवार को पेपर देने के बाद दोस्तों के साथ घर लौट रहा था। पढ़ें पूरी खबर…


