भास्कर न्यूज | अमृतसर मुख्यमंत्री सेहत योजना 22 जनवरी को लांच हुई थी, मगर इसके अगले ही दिन से ही सीएससी सेंटरों में कार्ड की रजिस्ट्रेशन बंद है। यह व्यवस्था 6 दिन बाद भी पटरी पर नहीं आ पाई है। इसका कारण एक कार्ड बनाने का फीस 7 रुपए तय करना है। पहले दिन विरोध के बाद सरकार ने फीस 7 से बढ़ाकर 20 रुपए करने की बात कही थी मगर आज तक लिखित में कुछ न मिलने के कारण सीएससी सेंटर संचालक कार्ड नहीं बना रहे। कार्ड बनाने के लिए जिस वेबसाइट पर डॉक्यूमेंट अपलोड किए जाने हैं, उसका सर्वर भी काफी डाउन चल रहा है। योजना को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए आम आदमी पार्टी की ओर से पार्टी के यूथ विंग के औ हदेदारों, ब्लाक प्रधानों और वालंटियरों को घर-घर जाकर लोगों की रजिस्ट्रेशन का काम सौंपा गया है। रजिस्ट्रेशन के बाद परिवार को एक कूपन दिया जाएगा, जिसके आधार पर परिवार के सभी सदस्य सीएससी (कम्युनिटी सर्विस सेंटर) जाएंगे। जहां पारिवारिक सदस्यों के वोटर कार्ड और आधार कार्ड के अलावा उनका केवाईसी किया जाएगा। उक्त प्रोसेस को पूरा करने के बाद करीब 15 दिन बाद हेल्थ कार्ड डाक सेवा द्वारा उनके घरों तक पहुंच जाएगा। वालंटियरों ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस काम में उनका पूरा दिन गुजर जाता है। सुबह से शाम तक उक्त कार्ड बनाने की रजिस्ट्रेशन करने में निकल जाता है। ऐसे में अपने कारोबार, नौकरी या रोजी-रोटी का जुगाड़ कैसे करें, यह सवाल उनके सामने आ खड़ा हुआ है। सर्वर की खामियों को दूर करने की कोशिश की जा रही है और दावा किया जा रहा है कि 30 जनवरी तक उक्त समस्या का हल हो जाएगा। अमृतसर के 618 में से 243 सेंटर कार्ड बनाने के लिए मान गए हैं, मगर वो भी लिखित आदेश आने के बाद ही कार्ड बनाएंगे। मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत एक परिवार को 10 लाख रुपए तक के इलाज की सुविधा मिलेगी। हालांकि इसमें से एक परिवार के लिए एक लाख रुपए इंश्योरेंस कवर होगा। स्कीम का यह पार्ट इंश्योरेंस कंपनी अस्पतालों को देगी। बाकी 9 लाख रुपए का खर्च पंजाब सरकार भरेगी। इससे इमपेनल्ड निजी अस्पताल चिंतित दिखाई दे रहे हैं, क्योंकि सरकार की ओर से अक्सर पेमेंट्स अटका ली जाती हैं। दूसरी तरफ इस स्कीम के शुरू करने से पहले निजी अस्पतालों की वर्ष 2021 से रुकी पेमेंट्स भी क्लीयर कर दी गई हैं, जिसके बाद अस्पतालों संचालकों ने नई स्कीम में सहयोग का वादा किया है। इस संबंध में प्राइवेट हॉस्पिटल एंड नर्सिंग होम एसोसिएशन पंजाब (फाना) के प्रधान डॉ. हिमांशु गुप्ता का कहना है कि सरकार से हुई बैठकों के दौरान उन्होंने सरकार को स्कीम के के लिए 2500 करोड़ का बजट रखने के लिए कहा था, लेकिन 1300 करोड़ का बजट रखा गया है। यह काफी कम है। बैठक में हेल्थ सेक्रेटरी कुमार राहुल की ओर से जहां निजी अस्पतालों को पेमेंट जल्द रिलीज किए जाने का भरोसा दिया गया है। वहीं सिविल सर्जन डॉ सतिंदरजीत सिंह बजाज के अनुसार सिविल अस्पताल अमृतसर, अजनाला और बाबा बकाला में 47 मरीज दाखिल हुए, जिनमें से 29 के मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत कार्ड बनाए गए हैं। गरीब परिवारों के लिए फायदेमंद होगी। खासकर ऐसे लोग जो अपने इलाज पर ज्यादा पैसे नहीं खर्च सकते हैं। ऐसे मरीजों का उपचार सरकारी और निजी अस्पतालों में मुफ्त हो पाएगा। स्कीम के तहत मरीजों को सिर्फ बेसिक सेहत सुविधा ही मिलेंगी। यदि कोई यह कहे कि उसे अत्याधुनिक इंप्लांट लगाए जाएं और मरीज को प्राइवेट रूम दिया जाए तो उनका स्कीम के तहत इलाज नहीं किया जाएगा। सरकार ने इस योजना में स्पष्ट किया है कि यदि कोई उक्त मांग करता है तो उससे लिखित में लिया जाए कि वह सरकार के हेल्थ कार्ड का उपयोग नहीं करना चाहता। इसके बाद सारा मेडिकल खर्च मरीज या उसके परिजन खुद वहन करेंगे। यानी अस्पतालों की जनरल वार्ड में ही स्कीम के तहत मरीजों का इलाज होगा। उन्हें विशेष सुविधाएं नहीं मिलेंगी। जिन अस्पतालों में जनरल वार्ड नहीं, वे प्राइवेट रूम को जनरल वार्ड में तब्दील कर मरीज का उपचार कर सकते हैं।


