आगामी 20 जनवरी से पंचायतों और पंचायत समितियों के पुनर्गठन की कवायद शुरू जाएगी। इसमें आबादी और क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से बदलाव होंगे। साथ ही पुनर्गठन में नई पंचायतों एवं पंचायत समितियों का भी सृजन होगा। इस संबंध में ग्रामीण विकास एवं पंचायतराज विभाग ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर पंचायतों और पंचायत समितियों के पुनर्गठन, पुनर्सीमांकन और नवसृजन के मानदंड तय किए हैं। ये रहेंगे मापदंड ग्राम पंचायतों के लिए न्यूनतम 3 हजार और अधिकतम साढ़े पांच हजार आबादी होगी। किसी ग्राम के निवासियों की मांग और प्रशासनिक दृष्टि से मौजूदा से दूसरी पंचायत में शामिल किया जा सकेगा, लेकिन दूरी पंचायत मुख्यालय से 6 किमी से ज्यादा नहीं होगी। किसी भी राजस्व ग्राम को विभाजित कर दो ग्राम पंचायतों में नहीं रखा जाएगा। संपूर्ण राजस्व ग्राम एक ही पंचायत में रहेगा। इसी तरह नवसृजित या पुनर्गठित पंचायत एक ही विधानसभा क्षेत्र में होगी। इसी तरह पंचायत समितियों में 40 या इससे ज्यादा ग्राम पंचायतें या 2 लाख या इससे अधिक आबादी होने पर पुनर्गठन के दायरे में आएंगी। नवसृजन में न्यूनतम 25 ग्राम पंचायतें शामिल होंगी। जन सुविधा और प्रशासनिक दृष्टि से नवसृजित या पुनर्गठित पंचायत समिति में नजदीकी पंचायतों को सम्मिलित किया जा सकेगा, लेकिन एक ग्राम पंचायत विभाजित कर दो पंचायत समितियों में नहीं रखा जाएगा। यह रहेगा टाइम फ्रेम जिला कलेक्टर की ओर से नई ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों के लिए प्रस्ताव तैयार किया जाएगा-20 जनवरी से 18 फरवरी 2025 तक, राजस्थान पंचायती राज्य अधिनियम 1994 की धारा 101 के तहत तैयार प्रस्तावों को प्रकाशित कर आपत्तियां आमंत्रित करना -20 फरवरी से 21 मार्च 2025 तक, प्राप्त आपत्तियों का निस्तारण करना – 23 मार्च से 01 अप्रैल 2025 तक, आपत्ति निस्तारण पश्चात प्रस्ताव तैयार कर पंचायती राज विभाग को भिजवाना -3 अप्रैल से 15 अप्रैल 2025 तक रहेगा झुंझुनूं जिला परिषद सीईओ कैलाशचंद शर्म ने बताया कि पंचायतों और पंचायत समितियों के पुनर्गठन की कवायद 20 जनवरी से शुरू होगी। इसमें आबादी और क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से मौजूदा संस्थाओं में बदलाव होंगे।


