सात साल पहले 2017 में 1.05 करोड़ रुपए खर्च करके बिट्टन मार्केट में बना बायो मिथेनाइजेशन प्लांट फेल साबित हुआ। शुरुआती दिनों में इस प्लांट की बिजली से बिट्टन मार्केट हाट बाजार की स्ट्रीट लाइट जलाई गईं। लेकिन, प्लांट बीच-बीच में बंद होता रहा। हाट बाजार का कचरा प्लांट तक पहुंचाने के लिए गाड़ियों और अमले की अलग से व्यवस्था की गई थी, लेकिन यह सफल नहीं हुई। दावा किया गया था कि 5 हजार वर्ग फीट जमीन पर बने इस प्लांट से 5 किलोवॉट बिजली बनेगी। जिस कंपनी ने यह प्लांट तैयार किया था, तीन साल पहले वह चली गई और तब से प्लांट पूरी तरह बंद है। अब नगर निगम एक बार फिर इस प्लांट को चालू करने के लिए हर महीने 50 हजार रुपए यानी साल में 6 लाख रुपए खर्चा करने जा रहा है। नगर निगम फिलहाल केवल तीन माह के लिए किसी प्राइवेट कंपनी को इसका कांट्रेक्ट देने जा रहा है, जिसे तीन साल के लिए बढ़ाया जा सकेगा। दावा किया जा रहा है कि इसके बाद 8 से 10 दिन में प्लांट पर बिजली बनना शुरू हो जाएगी। इससे हाट बाजार में लगी दोनाें हाइमास्ट लाइट जलाई जाएंगी। 750 रुपए प्रति टन का खर्च हो रहा बिट्टन मार्केट सब्जी बाजार का कचरा आदमपुर भेजने पर 400 रुपए प्रति टन खर्च होता है। आदमपुर में 350 रुपए प्रति टन की दर से इसका निष्पादन होता है। ऐसे में निगम को 750 रुपए प्रति टन की दर से खर्च करना होता है। जबकि, बिट्टन मार्केट में 500 रुपए प्रति टन से कचरे का निष्पादन होगा। निगम को प्रति टन 250 रुपए बचेंगे। कचरा ट्रांसपोर्टेशन खर्च बचेगा
बिट्टन मार्केट के प्लांट को शुरू किया जा रहा है। फल और सब्जी के कचरे का उपयोग कर बिजली बनेगी। इससे न सिर्फ बिजली मिलेगी, कचरे का मौके पर ही निष्पादन हो जाएगा। इससे निगम का कचरा ट्रांसपोर्टेशन का खर्च बचेगा।
हरेंद्र नारायण, कमिश्नर, नगर निगम


