वर्ष 1988 से 2006 तक के 126 कांस्टेबलों की अब जारी है प्रक्रिया : पुलिस में पदोन्नति के नाम पर किए जा रहे मजाक का एक उदाहरण यह भी देखना चाहिए। जिले में वर्ष 1988 से 2001 तक के बैच के 54 कांस्टेबलों, 2003 बैच के 50 और 2006 बैच के 22 कांस्टेबलों का पहला प्रमोशन अब वर्ष 2025 में किया गया है। हालांकि ये 126 कांस्टेबल अभी ट्रेनिंग पर नहीं भेजे गए हैं लेकिन इनकी पदोन्नति लिखित परीक्षा, फिजिकल परीक्षा पास कर ट्रेनिंग के लिए चयनित किया जा चुका है। नियमानुसार इनका पहला प्रमोशन 2012 में ही होना चाहिए था। लेकिन मुख्यालय द्वारा तय समय सीमा से भी 13 साल बाद इनको हेड कांस्टेबल बनाया जा रहा है। हेड कांस्टेबल से पदोन्नत होकर एएसआई बने 125 पुलिसकर्मियों में से 58 पुलिस कर्मी 1988 से 1998 के बीच हुई पुलिस कांस्टेबल भर्ती के हैं। ये पूर्व में आयोजित की गई पदोन्नति परीक्षाओं में अलग अलग कारणों से असफल होते रहे थे। इस कारण इनका बैच बदलता रहा। ज्यादा पुलिसकर्मी 1988 व 2001 मेंं हुई कांस्टेबल भर्ती के हैं। दो पुलिस कर्मी 2006 बैच के हैं जो कांस्टेबल से हेड कांस्टेबल गेलेंट्री प्रमोशन लेकर बने थे। ये भी बैकलॉग में सीटें खाली होने के कारण एएसआई बन गए हैं। अब जिले में अनुसंधान अधिकारियों के पद लगातार तेजी से भरे जा रहे हैं। भास्कर संवाददाता | श्रीगंगानगर पुलिस में आरपीएस से छोटे सभी पदों पर पदोन्नतियां बीते 15 वर्षों में कभी भी समय पर आयोजित नहीं की गईं। इसी का नतीजा है कि 20 दिसंबर को जिले के वर्ष 1988 से 2001 तक की भर्तियों के 123 हेड कांस्टेबलों को उनकी तय समय सीमा से तीन साल बाद एएसआई पदोन्नत किया गया है। इसमें दो हेड कांस्टेबल 2006 बैच के हैं जिनको गेलेंट्री प्रमोशन मिला था। पदोन्नत सभी हेड कांस्टेबल का सेवाकाल 2001 से ही मानें तो सरकारी सेवा में 9-18-27 नियम के तहत पहली पदोन्नति 2010 में की जानी चाहिए थी लेकिन की 2016 में गई। यानी नियमानुसार तो ये शुरुआत में ही 6 साल लेट हो गए। हालांकि पुलिस मुख्यालय ने वर्ष 2013-14 में पदोन्नति वर्ष मानकर इनको कांस्टेबल से हेड कांस्टेबल पदोन्नत किया। अब अगला प्रमोशन नियमानुसार तो 18 वर्ष की सेवा पूरी होने पर 2019 में होना था, लेकिन किया वर्ष 2025 में है। इसे भी वर्ष 2021-22 की रिक्तियों का आधार बनाकर प्रक्रिया की गई है। हालांकि नियमानुसार अब एएसआई बने इन 125 पुलिस कर्मियों का अगला प्रमोशन 2026 में होना प्रस्तावित है। लेकिन अगर पुलिस मुख्यालय की ओर से पदोन्नति परीक्षा प्रक्रिया में किन्हीं कारणों से देरी की तो मामला आगे भी खिसक सकता है। सब्र टूटा, अधिकतर ने अपने परिजनों, एसएचओ से ही लगवा लिए सितारे : पुलिस सहित बेल्ट धारी विभागों में नियम है कि पदोन्नति पर अगली रैंक पोस्टिंग जिले में सबसे बड़ा अधिकारी ही लगाता है। इन 125 हेड कांस्टेबलों को जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन ने 20 दिसंबर को पदोन्नत घोषित कर आदेश जारी किए। आगे 21 को रविवार का अवकाश था। इसलिए वर्षों से पदोन्नति का इंतजार कर रहे इन पुलिस कर्मियों का धैर्य जवाब दे गया और इनमें से अधिकतर ने अपने परिजनों और एसएचओ से रैंक के सितारे कंधे पर लगवा लिए। इसलिए इस बैच की एसपी डॉ. अमृता दुहन के साथ रैंक लगाते की ग्रुप फोटो भी नहीं हो पाई।


