भास्कर न्यूज | जांजगीर जिले में अपराध और सड़क हादसों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2025 की समीक्षा में यह सामने आया है कि सड़क हादसों में पिछले साल की तुलना में 6.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं, जिले में अपराधों की संख्या भी लगभग 6 प्रतिशत बढ़ी है। इस संबंध में जिले के पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में वर्ष भर की गतिविधियों और उपलब्धियों की जानकारी मीडिया के साथ साझा की। एसपी ने बताया कि जांजगीर-चांपा जिले में वर्ष 2025 में कुल 5,489 अपराध दर्ज किए गए, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 5,144 थी। यह लगभग 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इनमें हत्या, हत्या का प्रयास, रेप, अपहरण, डकैती, लूट, चोरी और नकबजनी शामिल हैं। जिले में वर्ष 2025 में कुल 248 मौतें सड़क हादसों में हुईं, जबकि पिछले साल यह संख्या 225 थी। यह 6.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। हादसों के प्रमुख कारण तेज गति से वाहन चलाना, लापरवाही, शराब सेवन के बाद वाहन चलाना, हेलमेट न पहनना और सड़क किनारे अतिक्रमण हैं। सबसे अधिक दुर्घटनाएं बाइक सवारों की हुईं। कुल 248 मौतों में 55 प्रतिशत मौतें बाइक सवारों की हैं। दुर्घटनाओं का सबसे ज्यादा असर जिला और सिंगल रोड्स पर देखने को मिला। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि सड़क किनारे शोल्डर डिप्रेशन, झाडिय़ां और अतिक्रमण भी हादसों का बड़ा कारण बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि शोल्डर डिप्रेशन के कारण वाहन असंतुलित होकर दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। इसके लिए जिला प्रशासन ने सभी ग्राम पंचायतों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्र की सड़क किनारों से झाडिय़ां और अतिक्रमण हटाएं। साथ ही ट्रॉमा सेंटर की कमी भी हादसों में मौत बढ़ने का कारण बनी हुई है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि अपराध संख्या में वृद्धि के बावजूद जिले में कुल मामलों में से 94 प्रतिशत मामलों का सफल निराकरण किया गया। यह राज्य में एक उदाहरण है। विशेष रूप से थाना शिवरीनारायण ने 96.45 प्रतिशत मामलों का समाधान कर जिले में सबसे अधिक अपराध निवारण का रिकॉर्ड बनाया। जिले में अपराध नियंत्रण के लिए पुलिस ने संगठित अपराध पर निगरानी, गंभीर अपराधों का त्वरित समाधान, साइबर अपराध रोकथाम और सामुदायिक पुलिसिंग के माध्यम से जनता में विश्वास बढ़ाने के प्रयास किए। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि जिले में अपराध नियंत्रण केवल पुलिस की कार्रवाई तक सीमित नहीं है। क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में पुलिस, अभियोजन और कोर्ट का समन्वय बेहद महत्वपूर्ण है। जिले में न्यायालयों के सहयोग और अभियोजन के समय पर प्रस्तुत होने के कारण दोषसिद्धि दर अन्य जिलों के मुकाबले अधिक रही। जिले में दोषसिद्धि दर 24–25 प्रतिशत रही, जबकि अन्य जिलों में यह केवल 10–12 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि ई-साक्ष्य के उपयोग से अब घटनास्थल पर ही गवाहों की स्टेटमेंट ली जा सकती है, जिससे अभियोजन मजबूत होता है और अपराधियों के खिलाफ सजा मिलने की संभावना बढ़ जाती है। सड़क सुरक्षा के लिए उठाए जाएंगे कदम { सड़क किनारे शोल्डर क्लियर करना और अतिक्रमण हटाना। { हेलमेट और सीटबेल्ट उपयोग को बढ़ावा देना। { शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई। { ट्रॉमा सेंटर की सुविधा बढ़ाना ताकि घायल मरीजों का समय पर इलाज हो सके।


