भास्कर न्यूज | कवर्धा स्कूलों में पढ़ाई, मध्याह्न भोजन और संसाधनों की कमी पर सवाल उठते रहे हैं। लेकिन अब शिक्षा विभाग के भीतर ही वित्तीय अनुशासन की पोल खुल गई है। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा कराए गए ऑडिट में 218 करोड़ रुपए का कैशबुक घोटाला सामने आया है। कैशबुक नहीं, आय-व्यय का कोई रिकॉर्ड नहीं और महीनों तक सरकारी पैसों का हिसाब ही नहीं है। ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर डीईओ एफआर वर्मा ने दो सहायक ग्रेड- 2 माया कसार और योगेंद्र कश्यप को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में माया कसार का अस्थायी मुख्यालय बीईओ ऑफिस सहसपुर लोहारा और कश्यप का बीईओ ऑफिस बोड़ला तय किया गया है। दोनों पर कैशबुक न लिखने और वित्तीय रिकॉर्ड अपडेट न करने का आरोप है। ऑडिट दल ने इसे कर्तव्य के प्रति घोर उदासीनता, गंभीर लापरवाही और स्वेच्छाचारिता करार दिया। यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 की धारा-3 का सीधा उल्लंघन है। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, सहायक ग्रेड- 2 माया कसार वर्तमान पदस्थापना पीएम श्री स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी स्कूल कचहरी पारा कवर्धा है। फरवरी 2024 से जून 2025 तक बीईओ ऑफिस कवर्धा में सहायक ग्रेड- 2 के पद पर पदस्थ रहीं।इस दौरान उनके पास वित्त शाखा का प्रभार भी था। पूरे 17 महीने तक कैशबुक ही नहीं लिखी गई। आय-व्यय का कोई लेखा संधारण नहीं किया। डीईओ एफआर वर्मा ने छग वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील नियम 1966 की धारा 9-1 के तहत तत्काल निलंबन का आदेश जारी किया है। योगेन्द्र सिंह कश्यप का अस्थायी मुख्यालय बीईओ ऑफिस बोड़ला तय किया गया है। सवाल उठता है कि क्या यह सिर्फ दो कर्मचारियों की लापरवाही है, या पूरे सिस्टम की विफलता? तत्कालीन बीईओ संजय जायसवाल पर कार्रवाई शून्य है।


