शिक्षा का अधिकार (आरटीई) में प्रवेश की प्रक्रिया 16 फरवरी से शुरू हो गई है। पहले दिन ही छात्र पंजीयन का पोर्टल नहीं खुल पाया। पालक दिनभर आवेदन करने के लिए च्वाइस सेंटरों के चक्कर लगाते रहे। पोर्टल नहीं खुलने से पहले दिन एक भी आवेदन नहीं भर पाए। इधर निजी स्कूल का पंजीयन व सत्यापन भी लगभग पूरा हो गया है। जिले में 220 स्कूलों ने आरटीई के तहत पंजीयन कराया है, जिसमें से सिर्फ पहली कक्षा में 471 सीट ही 25 प्रतिशत आरक्षण के तहत आरक्षित की गई है। नर्सरी, केजी-1 में प्रवेश बंद होने के कारण सीट बीते साल के मुकाबले 57 प्रतिशत घट गया। बीते साल 1092 सीट आरक्षित की गई थी, जिसके मुताबिक 621 सीट कम हो गई। शिक्षा सत्र 2025-26 में 471 सीट आरक्षित की गई है। इसके लिए 16 फरवरी से ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू होनी थी, लेकिन आरटीई का पोर्टल शुरू नहीं होने के कारण आवेदन ही नहीं हो पाया है। छात्र पंजीयन 16 फरवरी से 31 मार्च तक चलेगा। गरीबी रेखा प्रमाण पत्र बनवाने भटक रहे पालक : आरटीई का फार्म भरने के लिए बच्चे का गरीबी रेखा प्रमाण पत्र होना अनिवार्य है। इसके बगैर फार्म नहीं भर सकेंगे। लोक शिक्षण संचालनालय के नियमानुसार ग्रामीण क्षेत्रों में बीपीएल सर्वे में 2002-03 में नाम होने पर गरीबी रेखा प्रमाण पत्र बनेगा, जबकि शहरी क्षेत्रों में 2007-08 की सर्वे सूची और 2011 की सामाजिक एवं आर्थिक जातिगत जनगणना में नाम होने पर गरीबी रेखा प्रमाण पत्र बनाया जा रहा है। निगम के राजस्व शाखा में पालक बच्चों का गरीबी रेखा प्रमाण पत्र बनवाने भटक रहे हैं। सर्वे सूची में नाम नहीं होने के कारण कई पालकों को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। लॉटरी से होगा प्रवेश नए शिक्षा सत्र में आरटीई के तहत बच्चों को प्रवेश दिलाने के लिए इस साल पालकों को परेशान होना पड़ेगा। नर्सरी व केजी-1 में प्रवेश बंद होने से निजी स्कूलों में राशि देकर प्रवेश दिलानी पड़ेगी। सिर्फ पहली कक्षा में प्रवेश होगा। हर साल 3 हजार से अधिक पालक आवेदन करते हैं। सीमित सीट होने के चलते भाग्यशाली बच्चे को निजी स्कूल में निशुल्क पढ़ने का मौका मिलेगा। इस साल भी लॉटरी से ही सीटों का आबंटन किया जाएगा


