समर्थन मूल्य (एमएसपी) किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाने की सरकारी गारंटी हैI इसी का फायदा कुछ फर्जी किसान उठा रहे हैं। भास्कर की 20 दिन की ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन में सामने आया कि गुजरात की मंडियों में पहले ही बिक चुकी मूंगफली को व्यापारी और दलाल 55 से 60 रुपए किलो में दोबारा खरीद राजस्थान के एमएसपी केंद्रों पर 72.63 रुपए किलो में सरकार को बेच रहे हैं। जालोर जिले के सांचौर और रानीवाड़ा क्षेत्र के एमएसपी केंद्रों पर हो रही तुलाई में 60 प्रतिशत मूंगफली न यहां के खेतों में पैदा हुई और न स्थानीय किसानों की है। यह गुजरात की नेनावा मंडी से आ रही है। भास्कर टीम ने एक ट्रैक्टर की 24 घंटे रेकी कर देखा पूरा खेल। सबसे पहले पढ़िए- कैसे होती है मिलीभगत? मूंगफली खरीद के फर्जीवाड़े में फर्जी किसानों के सबसे बड़े मददगार हैं पटवारी से लेकर समर्थन मूल्य की खरीद वाले केंद्रों के कर्मचारी। दरअसल, गिरदावरी में बिना फसल वाले खेतों में मूंगफली दर्ज कर दी जाती है। उसी आधार पर पंजीयन होता है। भुगतान किसानों के खातों में जाता है और बाद में व्यापारी वह पैसा उनसे ले लेते हैं। सबसे बड़ा संकेत यह है कि जिस इलाके में आमतौर पर आरजी-37 किस्म की मूंगफली होती है, वहां एमएसपी केंद्रों पर आरजी-20 किस्म की तुलाई हो रही है। यानी मूंगफली न खेत की है, न किसान की। यह सिर्फ घोटाला नहीं, बल्कि किसानों के नाम पर एमएसपी सिस्टम का हाईजैक है। 2 दिन में इस तरह हुआ फर्जीवाड़ा नेनवा मंडी (गुजरात) 11 दिसंबर: सुबह 8 बजे एक ट्रैक्टर मंडी के गोदाम में पहुंचता है। वहां मूंगफली भरी जाती है। सुबह 9.10 बजे ट्रैक्टर मंडी से भरकर निकल जाता है। सुबह 11.34 बजे ट्रैक्टर MSP केंद्र सांचौर पहुंचता है। सांचौर केंद्र (राजस्थान) 12 दिसंबर: उसी ट्रैक्टर की सांचौर केंद्र पर तुलाई कर दी जाती है। इससे साफ है कि गुजरात मंडी का माल राजस्थान में बिकने आ रहा है। (इस दौरान रिपोर्टर ने 24 घंटे ट्रैक्टर की रेकी की।) 1 ट्रैक्टर पर 42 हजार का सीधा फायदा बाजार में मूंगफली 55 से 60 रु. किलो है। एमएसपी पर 72.63 रु. में ले रहे हैं। एक ट्रैक्टर (औसतन 35 क्विंटल) पर 42 हजार का फायदा। रोज 40-50 ट्रैक्टर पहुंचे तो सीजन में आंकड़ा करोड़ों में जा सकता है। आरजी-20 की पैदावार तो बीकानेर क्षेत्र में होती है रानीवाड़ा और सांचौर क्षेत्र में आरजी-37 किस्म की मूंगफली होती है। बावजूद एमएसपी केंद्रों पर आरजी-20 की तुलाई हो रही है। जो बीकानेर क्षेत्र में होती है और बड़ी मात्रा में गुजरात की नेनावा मंडी पहुंचती है। अब देखिए- फर्जीवाड़े में शामिल आरोपी एमएसपी केंद्र पर मेहराराम को रिश्वत नहीं दी तो 3 दिन बाद आएगा तुलाई का नंबर भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि एमएसपी केंद्रों पर तुलाई पूरी तरह सिस्टम के भरोसे नहीं, बल्कि रिश्वत के भरोसे चल रही है। जल्दी नंबर चाहिए तो पैसा। फर्जी माल की तुलाई करवानी है तो पैसा। पैसा नहीं दिया तो 2-3 दिन तक नंबर नहीं। सांचौर एमएसपी केंद्र पर कर्मचारी मेहराराम को तुलाई के दौरान रिश्वत लेते हुए भास्कर ने कैमरे में कैद किया। फर्जीवाड़े के इस खेल में भरत चौधरी (दुकानदार), कानाराम देवासी (मूंगफली लाने वाला) और दिनेश चौधरी भी शामिल है।


