प्रदेश में धान की कटाई का सीजन अब लगभग समाप्त हो चुका है और पराली जलाने की घटनाएं भी नाममात्र रह गई हैं। बावजूद इसके हवा की गुणवत्ता में कोई खास सुधार नहीं दिख रहा है। रविवार को 3 जगह पराली जली, जिसके बाद इस सीजन का कुल आंकड़ा बढ़कर 5088 तक पहुंच गया। प्रशासन और कृषि विभाग का दावा है कि गत वर्षों की तुलना में पराली जलाने के मामलों में गिरावट आई है, लेकिन हवा पर इसका सकारात्मक असर नहीं पड़ा। इधर, प्रमुख शहरों लुधियाना, पटियाला, जालंधर, अमृतसर और बठिंडा का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) रविवार को येलो कैटेगरी (मॉडरेट) में रिकॉर्ड किया गया। इसका मतलब है कि हवा कमजोर श्रेणी में है और संवेदनशील लोगों के लिए जोखिम अभी मौजूद है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि औद्योगिक उत्सर्जन, वाहन प्रदूषण और मौसम में आ रही ठंडक हवा को नीचे दबा रही है, जिससे हवा की गुणवत्ता में सुधार नहीं हो पा रहा है।


