महागामा से भाजपा का टिकट दिलाने के नाम पर निरंजन और विवेक के बीच हुई लेनदेन के मामले से राज्यसभा सदस्य दीपक प्रकाश ने खुद को अलग बताया है। पत्र भेजकर उन्होंने दैनिक भास्कर में 18 दिसंबर को छपे “भाजपा का टिकट दिलाने के लिए संसद दीपक के घर हुई थी 24 लाख की डील” शीर्षक वाली खबर पर आपत्ति जताई है। उन्होंने पत्र में कहा है खबर में दिए गए निरंजन और विवेक के स्टेटमेंट से स्पष्ट है कि इन दोनों के बीच कोई विवाद था। लेकिन इसमें मेरी कोई भूमिका नहीं थी। दोनों में से किसी ने एक भी शब्द मेरी किसी भूमिका के बारे में नहीं कहा है। लेकिन समाचार की हेडलाइन में मेरा जिक्र है, जो गलत है। मेरे पक्ष को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया: पत्र में दीपक प्रकाश ने कहा है कि मेरे पक्ष को भी तोड़-मरोड़ कर समाचार में पेश किया गया है। इससे मेरी प्रतिष्ठा धूमिल हुई है। प्लीडर नोटिस के आधार पर भास्कर ने खबर छापी निरंजन की ओर से विवेक को भेजे गए प्लीडर नोटिस में दीपक प्रकाश के दिल्ली आवास पर लेनदेन की बात कही गई है। भास्कर ने इसी आधार पर यह खबर प्रकाशित की है। दीपक प्रकाश की छवि धूमिल करने की कोई मंशा नहीं है। इसमें हर पक्षों से बातचीत कर उनका पक्ष भी छापा गया है। लिखित में पक्ष मांगा, वॉट्सएप कॉल पर दिया जवाब दीपक प्रकाश से मोबाइल पर बात कर लिखित में पक्ष भेजने को कहा गया था। उन्होंने लिखित जवाब न देकर वॉट्सएप कॉल पर अपनी बात रखी, जिसे हू-ब-हू छापा गया। उनके पक्ष को उनके वॉट्सएप नंबर पर भेजा गया। फिर उन्होंने कुछ संशोधन कराया। इसके बाद उसे प्रकाशित किया गया।


