25 हजार किया, 50 करोड़ से अधिक निवेश वाली प्रीमियर संस्थाओं के लिए तीन साल की बाध्यता नहीं

भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा यूआईटी से रियायती दर पर जमीन आवंटन कराने के लिए अब आवेदन फीस 25 हजार रुपए होगी। पहले यह राशि केवल 5 हजार रुपए थीं। इसके अलावा आवंटित जमीन पर दो साल में निर्माण पूरा करना होगा। इसके बाद राज्य सरकार के अनुमोदन के बाद आवंटन निरस्त किया जा सकेगा। हालांकि, निर्माण की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए न्यास दो साल का समय बढ़ा सकता है। इसके बाद राज्य सरकार के स्तर पर जमीन की आवंटित दर का 10 प्रतिशत प्रति वर्ष जुर्माना लेकर अतिरिक्त छूट दी जा सकेगी। यह प्रावधान नगरीय विकास एवं आवासन विभाग की ओर से भूमि आवंटन नीति के ड्राफ्ट में किए गए। वर्तमान में प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में भूमि आवंटन नीति-2015 लागू है। जिसमें समय-समय पर अधिसूचनाएं, आदेश व परिपत्र जारी कर नवीन प्रावधान जोड़े गए हैं। इन संशोधनों व नए प्रावधानों के कारण नगर निकायों में भ्रांति बनी हुई है। ऐसे में भूमि आवंटन के प्रकरणों के निस्तारण में सरलीकरण करने के लिए भूमि आवंटन नीति-2024 का प्रारूप तैयार किया है। निजी कॉलोनाइजर की जमीन भी सार्वजनिक करना अनिवार्य भूमि आवंटन नीति-2024 के तहत नगर विकास न्यास को उसकी योजना, गैर योजना क्षेत्रों, निजी विकासकर्ताओं की ओर से स्वीकृत कराई गई योजनाओ, एकल पट्टों में समर्पित जमीन व अन्यत्र स्थानों पर विभिन्न उद्देश्यों के लिए आवंटन योग्य उपलब्ध विकसित व अविकसित जमीन को चिन्हित कर विवरण, लोकेशन, क्षेत्रफल, जमीन की दर आदि विभागीय पोर्टल पर उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। इससे पहले भूमि आवंटन नीति-2015 में केवल सरकारी जमीन का विवरण ही पोर्टल पर देने का प्रावधान था। इन सुविधाओं के लिए भी हो सकेगा आवंटन… सामुदायिक केंद्र, नशा मुक्ति केंद्र, वृद्धाश्रम, अनाथ आश्रम, पेंशनरों के लिए विश्राम घर, निशक्तजन, मूक-बधिरों के लिए शिक्षण-प्रशिक्षण केंद्र, सार्वजनिक प्याऊ, वाल्मिकी भवन, कुष्टाश्रम, प्रेस क्लब, सार्वजनिक पुस्तकालय, वाचनालय, धर्मशाला, कामकाजी महिला छात्रावास, रैन बसेरे व बस शेल्टर के लिए भी जमीन का आवंटन किया जा सकेगा।

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