250 आंगनबाड़ी भवन विहीन, खस्ताहाल कितनी विभाग को नहीं मालूम, बेपरवाही

भास्कर न्यूज | दंतेवाड़ा जिले में संवेदनशील क्षेत्रों में आंगनबाड़ी भवन जर्जर हैं पर इनकी मरम्मत के नाम पर महज खाना पूर्ति की जाती है। जिले में 20 से ज्यादा आंगनबाड़ी भवन ऐसे हैं जहां भवन होने के बावजूद इनके अंदर बच्चों को नहीं बिठाया जाता है। कार्यकर्ता कहती हैं डर लगता है कब गिर जाए, छत से पानी टपकता है और दीवार गीली हो जाती है। आंगनबाड़ी दिखने में ठीक इसलिए है क्योंकि इनकी मरम्मत के नाम पर सिर्फ रंगाई, पुताई कर दी गई है। जिले के किरंदुल परियोजना के गुमियापाल के बंडीपारा आंगनबाड़ी में 40 बच्चे दर्ज हैं पर इन बच्चों के लिए भवन भी ठीक नहीं है। बच्चे आंगनबाड़ी के बाहर ही रहते हैं, बाहर ही इनको खाना खिलाया जाता है। कार्यकर्ता ने बताया कि भवन जर्जर होने की सूचना विभाग को कई दफे दी जा चुकी है पर पुट्ठी और पुताई कर दिया गया है लेकिन भवन जर्जर ही है। जिले के चार ब्लाकों में 1062 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, इनमें से बड़ी संख्या में केंद्रों में सुविधाओं का अभाव है, टॉयलेट-बाथरूम तक नही हैं, गैस सिलेंडर-चूल्हा सभी केंद्रों को दिया गया है पर रिफिलिंग के लिए बजट नहीं देने से आज भी सहायिका चूल्हा फूंक रही हैं, बारिश में कार्यकर्ताओं को खासी दिक्कत होती है। जिला कार्यक्रम अधिकारी वरुण नागेश ने कहा कि नई आंगनबाड़ी भवन बन रहे हैं, कितनी आंगनबाड़ी जर्जर हैं दस्तावेज देखकर बताएंगे। गुमियापाल में चलने वाली 4 आंगनबाड़ी केंद्रों में 2 जर्जर है। यहां सहायिका खुले में भोजन पकाती हैं, गैस चूल्हा तक नहीं है, जंगल की गीली लकड़ियों के सहारे सहायिका की पोषण युक्त भोजन बनाने की जवाबदारी है। सहायिका ने कहा कि अभी बारिश नहीं हो रही है इसलिए आंगनबाड़ी के बाहर भोजन बना रहे हैं, बारिश शुरू हो जाएगी तो अपने घर से खाना बनाकर केंद्र में लाती हैं, किचन भी नहीं है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं झोपड़ी में तो कहीं सहायिका के घर में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रही है। गुमियापाल में आंगनबाड़ी भवन होने के बावजूद भवन विहीन जैसी स्थित है पर विभाग के दस्तावेज में आंगनबाड़ी भवन ठीक है, जिसकी वजह से नए भवन की स्वीकृति नहीं मिल रही है। जिले में सिर्फ गुमियापाल ही नहीं बुरगुम, निलावाया, रेवाली, नडेनार, मारजुम जैसे गांवों में भी आंगनबाड़ी भवनों की स्थित दयनीय है। खुले में बनता है बच्चों के लिए भोजन

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