नहरबंदी की सूचना जनवरी में ही जारी होती रही है। उस आधार पर पीएचईडी पूर्ण नहरबंदी के लिए इंतजाम करता था। इस बार मार्च का पहला सप्ताह बीतने तक पंजाब ने नहरबंदी का कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं किया। फिर भी चर्चा है कि 26 मार्च से नहरबंदी संभव है। अगर इसे सही मानें तो नहरबंदी के लिए सिर्फ 20 दिन बचे हैं। पीएचईडी ने जलस्रोत भरने शुरू नहीं किए। इसलिए 26 अप्रैल से 26 मई के बीच पूर्ण नहरबंदी की संभावना है। ऐसे में भीषण गर्मी में नहरी क्षेत्र के ढाई करोड़ लोगों के सम्मुख पानी का भारी संकट होगा। 2020 से इंदिरा गांधी नहर की मरम्मत पंजाब सीमा में शुरू हुई। वैसे ये नहरबंदी 2018 में होनी थी लेकिन तब पंजाब ने समय पर टेंडर नहीं किए। 2019 में कोरोना आ गया जिसकी वजह से श्रमिक नहीं मिले। 2020 से काम शुरू हुआ। करीब 112 किलोमीटर लंबी नहर में 96 किलोमीटर की मरम्मत पूरी हो गई। करीब 16 से 19 किलोमीटर का इलाका मरम्मत के लिए बचा है। पिछले साल लोकसभा चुनाव की वजह से सरकार ने नहरबंदी नहीं की। इस साल 70 दिन की नहरबंदी का आखिरी साल है। मगर मार्च का पहला सप्ताह बीतने के बाद भी पंजाब ने अब तक कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं किया। सूत्र बताते हैं कि पंजाब ने राजस्थान के अभियंताओं को मौखिक संकेत दिए हैं कि 26 मार्च से आंशिक नहरबंदी शुरू होगी जो 30 दिन चलेगी। उसके बाद 30 दिन पूर्ण नहरबंदी चलेगी। 26 मार्च से आंशिक नहरबंदी के आसार, तिथि तय नहीं इसलिए नहीं भरे जा रहे जलाशय ग्रामीण क्षेत्र के जलाशय हों या डिग्गियां, वन्य जीवों की प्यास बुझाने के लिए जलस्रोत हों या शहरों के जलाशय। ये सभी आंशिक नहरबंदी से पहले भरने होंगे क्योंकि आंशिक नहरबंदी के दौरान उतना ही पानी मिलेगा जिससे रोजमर्रा का काम चल सके। जलाशय भरने के लिए आंशिक नहरबंदी से पहले इतना पानी देना होगा जिससे सारे जलस्रोत लबालब हो सकें। मगर ये सारे जलाशय आंशिक से पहले ही भरने होंगे। उसके लिए पहले पीएचईडी को समय देना होगा। पीएचईडी अधिकारी भी नहर विभाग के इशारे का इंतजार कर रहा है क्योंकि नहर विभाग को तिथि बताकर फ्री हो जाएगा लेकिन परेशानी पीएचईडी होगी। पानी कम मिलने पर घेराव, धरना प्रदर्शन तो जिले में होंगे।


