36 साल बाद खुली बिलाई माता मंदिर की बावली:25 फीट गहरी बावली में गंगा दशहरा पर भक्तों ने किया जलार्पण, 100 मीटर लंबी कतार

छत्तीसगढ़ के धमतरी स्थित बिलाई माता मंदिर में 36 साल बाद एक पुरानी बावली को पुनर्जीवित किया गया है। गंगा दशहरा के शुभ अवसर पर इस 25 फीट गहरी बावली को खोला गया। मंत्रोच्चार के साथ विशेष पूजा-अर्चना की गई। महाकुंभ, त्रिवेणी संगम, प्रयागराज और महानदी से लाए गए पवित्र जल को बावली में अर्पित किया गया। भक्तों ने जलार्पण के लिए 100 मीटर लंबी कतार में खड़े होकर घंटों इंतजार किया। करीब डेढ़ महीने पहले बावली की खुदाई कर अंदर जमी मिट्टी को निकाला गया। इस मिट्टी को महानदी में विसर्जित किया गया। धमतरी शहर में दो प्रमुख बावलियां हैं – एक शीतला मंदिर में और दूसरी बिलाई माता मंदिर में। मां विंध्यवासिनी बिलाई माता मंदिर में स्थित इस बावली को किन्हीं कारणों से पाट दिया गया था। माता की प्रेरणा से डेढ़ महीने तक खुदाई और मरम्मत का कार्य किया गया। बावली के अंदर की सीढ़ियां अपने पुराने स्वरूप में यथावत हैं। मंदिर ट्रस्ट और सर्व समाज ने गंगा दशहरा के दिन से जल संरक्षण की नई पहल शुरू करने का निर्णय लिया है। बावली में गंगाजल अर्पित कर पुनर्जीवित किया गया जल स्रोत, भक्तों ने जताई आस्था गुरुवार को, मां विंध्यवासिनी बिलाई माता मंदिर के पास स्थित बावली में गंगाजल और अन्य पवित्र जल अर्पित किया गया। इस अवसर पर मंत्रोपचार और धार्मिक अनुष्ठान भी किए गए, जिससे जल स्रोत को पुनर्जीवित किया गया। मंदिर प्रबंधन ने इस कार्य को सुनिश्चित करने के लिए भक्तों को जल अर्पित करने का समय सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक निर्धारित किया था। इस दौरान मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं, जो घंटों तक इंतजार करते रहे। कुछ महिला संगठन भी हनुमान चालीसा और माता के भजनों के साथ बावली के पास मौजूद थे। इस दौरान पुलिस बल ने सुरक्षा के उपायों के तहत भीड़ को नियंत्रित किया, ताकि कोई भगदड़ न हो। मां विंध्यवासिनी कॉरिडोर बनाने की योजना पंडित महेश शास्त्री ने बताया कि यह बावली लंबे समय तक बंद थी, और अब इसे मां विंध्यवासिनी ट्रस्ट द्वारा पुनः खोला गया है। इसके लिए खुदाई का कार्य भी किया गया था। इस कार्य को धमतरी नगर विप्र विद्वत परिषद ने संपन्न किया। महापौर रामू रोहरा ने भी इस कदम की सराहना की और कहा कि ट्रस्ट की यह पहल ऐतिहासिक महत्व रखती है। उन्होंने आगे बताया कि आने वाले समय में मां विंध्यवासिनी कॉरिडोर बनाने की योजना है, जो दानी टोला चौक से ब्रह्म चौक तक होगा। बावली बनी आस्था का केन्द्र श्रद्धालुओं ने बावली को लेकर अपनी आस्था और विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि यह जल स्रोत एक प्रकार से तीर्थ स्थल माना जाता है। भक्तों का मानना था कि बावली के खुलने से न केवल उनकी धार्मिक आस्था को बल मिलेगा, बल्कि शहर को भी इसका लाभ होगा। कुछ भक्तों ने बताया कि वे बचपन में भी इस बावली में जल लेकर आचमन करते थे और अब फिर से यह ऐतिहासिक स्थल खुल गया है। 36 साल बाद खुली 200 साल पुरानी ऐतिहासिक बावली मां विंध्यवासिनी बिलाई माता मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष आनंद पवार ने बताया कि यह बावली 200 साल पुरानी है, जिसे 36 साल पहले किसी कारणवश बंद कर दिया गया था। अब भक्तों की भावनाओं को समझते हुए इसे पुनर्जीवित किया गया है। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में करीब डेढ़ महीने का समय लगा। बावली की गहराई करीब 25 फीट है, और इसे जल अर्पित करने के लिए भक्त अपने घरों से पवित्र जल लेकर आए थे। इसके अलावा, गंगा जमुना, त्रिवेणी संगम, रामेश्वरम और गंगोत्री से भी जल लाया गया। बावली के पुनः खोले जाने का कार्य पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ किया गया है। गंगा दशहरा पर हुआ विशेष पूजन ट्रस्ट के अध्यक्ष ने यह भी बताया कि बावली की खुदाई के दौरान सीढ़ियां भी मिल गई, जो अब एक नए स्वरूप में भक्तों के दर्शन के लिए तैयार हैं। अगले एक महीने में बावली को और आकर्षक बना कर श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोला जाएगा। 5 जून को गंगा दशहरा के मौके पर इस पुनर्जीवित बावली में मंत्रोपचार के साथ पवित्र जल अर्पित किया गया।

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